भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४४ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे
नस्य देने के पश्चात् निषिद्ध कर्म १०३३ | उत्तम रीति से रक्तस्राव के लक्षण १०५१
नस्य के हीनयोग तथा अतियोग की चिकित्सा १०३४ | रक्तस्राव कराने के बाद त्याज्य १०५१
षष्ठंधूमपानादिविधिप्रकरणम् | नेत्र को स्वच्छ करने की विधि १०५१
धूमपान की विधि १०३४ | नेत्र को सेक करने की विधि १०५२
धूमपान में ओषधि का कल्क १०३७ | नेत्र के आश्च्योतन विधि १०५२
गृह में देने योग्य धूम १०३७ | पिण्डी की विधि १०५३
धूमपान में त्याग करने योग्य कार्य १०३७ | विडालक विधि १०५३
गण्डूष की विधि १०३७ | तर्पण विधि १०५३
गण्डूष के भेद १०३८ | तर्पण के योग्य नेत्रों के लक्षण १०५३
गण्डूष तथा कवल की औषधियों का मान १०३८ | रोगभेद से तर्पण धारण करने के काल का भेद १०५४
गण्डूष तथा कवल धारण करने में अवस्था | यथार्थ तर्पण के चिह्न १०५४
की मर्यादा १०३८ | अतितर्पित नेत्र के लक्षण १०५४
गण्डूष धारण के गुण १०३८ | पुटपाक की विधि और भेद १०५५
कवलधारण की विधि १०३८ | पुटपाकों के धारण काल की अवधि १०५५
प्रतिसारण की विधि १०३९ | तिक्तक द्रव्य १०५६
स्वेद की विधि १०३९ | तर्पण तथा पुटपाक धारण किये हुये लोगों के
स्वेद के अयोग्य व्यक्ति १०४० | लिये त्याज्य कर्म १०५६
तापस्वेद की विधि १०४१ | अञ्जन की विधि और भेद १०५६
ऊष्मस्वेद की विधि १०४१ | लेखनकारिणी वर्ति १०५८
उपनाहस्वेद की विधि १०४२ | रोपणकारिणी वर्ति १०५८
द्रवस्वेद की विधि १०४३ | स्नेहनकारिणी वर्ति १०५८
सिर में तेल डालने की विधि १०४४ | लेखनकारिणी रसक्रिया १०५८
कान में तेल डालने की विधि १०४५ | रोपणकारिणी रसक्रिया १०५८
लेप की विधि १०४५ | स्नेहनकारिणी रसक्रिया १०५८
दोषघ्न लेप १०४६ | लेखन चूर्ण १०५९
विषहा लेप १०४६ | रोपण चूर्ण १०५९
मुखकान्तिदायक लेपं १०४६ | स्नेहन चूर्ण १०५९
लेप के दो भेद १०४७ | प्रत्यञ्जन सेवन विधि १०५९
शोणितस्राव की विधि १०४८ | नयनामृत चूर्ण १०६०
वातादि से दूषित रक्तों के लक्षण १०४८ | दृष्टि को स्वच्छ करने वाली शलाका १०६०
शुद्ध रक्त के लक्षण १०४८ | औषध खाने के पांच समय १०६०
रक्तस्राव के विषय १०४९ | निरन्न कोष्ठ में ओषधि सेवन के गुण १०६१
रक्तस्राव के साधन १०४९ | अन्न के साथ ओषधि सेवन के गुण १०६२
सिरामोक्षण के अयोग्य जन १०४९ | ओषधि के पाकापाक का लक्षण १०६२
अधिक रक्त निकलने के दोष १०५० | रोगिपरीक्षाप्रकरणम्
रक्त के अधिक निकल जाने पर वायु के | वाग्भटोक्त रोगी की परीक्षा १०६३
कुपित होने की चिकित्सा १०५१ | नेत्र की परीक्षा १०६३
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