भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)
Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary
आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२ भावप्रकाशस्य पूर्वखण्डे
मारण के योग्य तामा के लक्षण ९७७ | शुद्ध किये हुए शिलाजीत के गुण ९८८
मारण के योग्य तामा के लक्षण ९७७ | रस की स्वेदन विधि ९८८
तामा के शोधने की विधि ९७८ | रस की मर्दन विधि ९८९
तामे के ८ दोष ९७८ | रस की मूर्च्छन विधि ९८९
तामे के मारने की विधि ९७८ | मूर्च्छन विधि ९९०
मारे हुए तामे के गुण ९७९ | रस की ऊर्ध्वपातन विधि ९९०
रांगा का स्वरूप ९७९ | रस की अधःपात विधि ९९०
अशुद्ध वङ्ग के दोष ९७९ | पारे के दोषों को दूर करने की शोधन विधि ९९१
रांगा तथा सीसा के शोधन की विधि ९७९ | पारे के मारने की विधि ९९१
रांगा के मारण की विधि ९८० | रसकर्पूर बनाने की विधि ९९२
मारे हुए रांगा के गुण ९८० | सिन्दूररस बनाने की विधि ९९३
सीसे का स्वरूप ९८० | मारित-मूर्च्छित पारे के गुण ९९३
सीसा के शोधन की विधि ९८० | हिङ्गुल की शोधन विधि ९९४
सीसा के मारने की विधि ९८१ | शुद्ध हिङ्गुल के गुण ९९४
मारे हुए सीसा के गुण ९८१ | सिंगरफ से पारा निकालने की विधि ९९४
अशुद्ध लोहा के दोष ९८१ | अशुद्ध गन्धक के दोष ९९५
लोहा के दोष की शान्ति के लिये शोधनविधि ९८१ | गन्धक शोधने की विधि ९९५
लोहा के मारणविधि ९८१ | शुद्ध गन्धक के गुण ९९५
मारे हुए लोह के गुण ९८२ | अशुद्ध अभ्रक के दोष ९९५
लौहभस्म खाने की मात्रा ९८३ | अभ्रक शोधन-मारण विधि ९९५
लौहभस्म खाने के समय त्याज्य द्रव्य ९८३ | धान्याभ्रक बनाने की विधि ९९६
धातुओं के मारने की साधारण विधि ९८३ | मारे हुये अभ्रक के गुण ९९६
अशुद्ध स्वर्णमाक्षिक के दोष ९८३ | अशुद्ध हरताल के दोष ९९६
सोनामाखी शोधने की विधि ९८३ | हरताल शोधने की विधि ९९६
सोनामाखी मारने की विधि ९८३ | हरताल मारने की विधि ९९७
रूपामाखी शोधने की विधि ९८४ | शुद्धाशुद्ध हरताल के गुण ९९७
रूपामाखी मारने की विधि ९८४ | अशुद्ध मैनसिल का स्वरूप ९९७
सोनामाखी तथा रूपामाखी के विशेष गुण ९८४ | मैनसिल शोधने की विधि ९९८
अशुद्ध तूतिया के शोधन की विधि . ९८४ | शुद्ध की हुई मैनसिल के गुण ९९८
शुद्ध तूतिया के गुण ९८४ | खपरिया के शोधन की विधि ९९८
कांसा तथा पीतल के शोधन की विधि ९८५ | शुद्ध खपरिया के गुण ९९८
कांसा तथा पीतल के मारने की विधि ९८५ | उपरसों के शोधन की साधारण विधि ९९८
मारे हुए कांसा तथा पीतल के गुण ९८५ | अशुद्ध हीरे के दोष ९९९
सिन्दूर के शोधने की विधि ९८५ | हीरा शोधने की विधि ९९९
सिन्दूर के गुण ९८५ | हीरा मारने की विधि ९९९
शिलाजीत के लक्षण ९८६ | मारे हुए हीरे के गुण ९९९
शिलाजीत के शोधन की विधि ९८६ | शेष रत्नों की शोधन-मारण विधि १०००