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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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७० पुस्तक प्रवेश
था । वे अपने अलग अलग क़बीलों के अनेक देवी देवताओं को मानते थे
और उनकी मूर्तियों की पूजा करते थे । उस समय के अनेक यात्रा वृत्तान्तों
से साबित है कि ये अरब अत्यन्त सरल स्वभाव और उदार चित्त होते थे,
भारतवासियों से उनका मेल जोल और प्रेम ख़ूब बढ़ा हुआ था और
भारत में उनकी बस्तियाँ ख़ूब ख़ुशहाल थीं ।
इसके बाद मोहम्मद साहब के जन्म और इसलाम के प्रचार का समय
आया । अरबों और ख़ासकर अरब व्यापारियों का भारत आना जाना पहले
की तरह जारी रहा । फ़रक़ केवल यह हो गया कि पुराने मूर्तिपूजक अरबों
की जगह अब निराकार के उपासक नए मुसलमान अरब भारत आने लगे ।
या वही अरब अब मुसलमान हो गए, उनके साथ साथ अब एक नए
मज़हब और इसलाम के नए विचारों और नए आदर्शों ने भी भारत में
प्रवेश किया । हमें याद रखना चाहिए कि अरब मुसलमानों और उनके साथ
इसलाम के इस तरह भारत में प्रवेश करने का किसी सैन्य यात्रा या फ़ौजी
हमले से कोई सम्बन्ध न था ।
आठवीं सदी का भारत
इस स्थान पर आगे बढ़ने से पहले उस समय के भारत की हालत को
संक्षेप में बयान कर देना भी आवश्यक है । ईसा की सातवीं सदी के मध्य
में सम्राट हर्षवर्धन की सत्ता का अन्त हुआ । उत्तर भारत टुकड़े टुकड़े होकर
अनेक छोटी छोटी रियासतों में बँट गया । राजपूतों ने पश्चिम से चल कर
उत्तर पूरब में और मध्य भारत में अनेक छोटी छोटी रियासतें क़ायम कर
लीं । अनेक नई जातियाँ अपने को राजपूत कहने लगीं । यहाँ तक कि
मुसलमानों के आने से ठीक पहले पञ्जाब से दक्खिन तक और बङ्गाल से