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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 94

६८ पुस्तक प्रवेश
(२) यह कि इतिहास लेखक विल्क्स के अनुसार इराक़ का गवर्नर
हज्जाज अपने देश में तेज़ मिज़ाज मशहूर था और इराक़ के अनेक
मुसलमानों ने उसकी सख्तियों से भाग कर भारत के दक्खिन में कोकण
और रासकुमारी आदि स्थानों में आश्रय लिया था।
(३) यह कि इतिहास से पता चलता है कि मोहम्मद बिन क़ासिम
सिन्ध के अन्दर अपनी हिन्दू और मुसलमान प्रजा के साथ एक समान
निष्पक्ष व्यवहार करता था।
सिन्ध विजय के बाद उसने हज्जाज से लिख कर पूछा कि यहाँ के
लोगों के साथ कैसा व्यवहार किया जावे। हज्जाज ने उत्तर दिया—
“जब कि उन लोगों ने आत्मसमर्पण कर दिया है और ख़लीफ़ा
को टैक्स देना मंज़ूर कर लिया है तो उनसे और कुछ भी चाहना जायज़
नहीं है। हमने उन्हें अपनी हिफ़ाज़त में ले लिया है, और हम किसी तरह
भी उनके जान या माल पर हाथ नहीं उठा सकते। उन्हें अपने देवताओं
की पूजा करने की इजाज़त दी जाती है। हरगिज़ किसी शख़्स को भी न
अपने धर्म का पालन करने से मना करना चाहिये और न रोकना चाहिये।
अपने घरों में वे जिस तरह चाहें रहें।”*
डॉक्टर बेनीप्रसाद ने अपनी पुस्तक 'जहांगीर के इतिहास' में लिखा
है कि—“८ वीं सदी में मोहम्मद बिन क़ासिम की सिन्ध पर हुकूमत नरमी
और धार्मिक उदारता की एक जीती जागती मिसाल थी।”†

  • "The History of Medieval India." by Ishwari Prasad, p. 52, 53.
    † "Mohammad Bin Qasim's administration of Sindh in the 8th century
    was a shining example of moderation and tolerance "--History of Jehangir,
    by Dr. Beniprasad, p. 89.