भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 88, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें६२ पुस्तक प्रवेश
का संहार किया, लोगों को गुलाम बना लिया, नगरों को जला
डाला, और ईसाई जरमनी, लो-कन्ट्रीज़ (हॉलेण्ड और बेल्जियम)
पच्छिमी फ़्रांस, स्कॉटलैण्ड, आयरलैण्ड और इङ्गलिस्तान को लूट
लिया या बरबाद कर दिया। पूरबी यूरोप में हूण और अवार
जातियों के भाई-बन्द मगियार जाति ने डेन्यूब के मैदानों में, और
मध्य यूरोप, उत्तर इतालिया और पूरबी फ़्रान्स में बरबादी फैला
दी। दक्खिन यूरोप में बर्बर और अरब जाति के लुटेरों, सैरेसेन
लोगों ने इतालिया के समुद्रतट और पास के टापुओं में, प्रावेन्स
में और डोफ़्राइन (दक्खिन पूरबी फ़्रांस) में लूट मार जारी
रक्खी।"*
इन तमाम क़रीब एक हज़ार साल के हमलों के नतीजों को बयान
करते हुए बुइसोनेद् अन्त में लिखता है—
“असभ्य जातियों के हमलों ने एक सच्ची आफ़त बरपा कर दी।
दो सौ साल के अन्दर ही ईसाई रोमन साम्राज्य का वह व्यवस्थित
भवन, जिसकी छाया के नीचे मज़दूरों और कारीगरों ने
उन्नति की थी और वे मालामाल हो गए थे, पच्छिमी यूरोप में
नींव से लेकर शिखर तक उलट गया और पूरबी यूरोप में भी
उसकी बुनियादें बेहद खोखली हो गईं। हर तरफ़ खण्डहर
दिखाई देते थे, व्यवस्था की जगह अव्यवस्था और अराजकता का
राज था, और क़ानून की जगह जिसकी लाठी उसकी भैंस का
- Life and Work in Medieval Europe, by P. Boissonade, book i,
chapter x, p. 115.