भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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रक्खी थी, खण्डहर होकर ढेर होगए। $\times\times\times$ पोप ग्रिग़री पहला
चिल्लाने लगा, 'मालूम होता है कि दुनियां का अन्त होने वाला
है। $\times\times\times$ पैनोनिया, नारिकम, रेटिया, हैलवेशिया (स्वीज़र-
लैण्ड), गॉल (फ़्रान्स), बेलजियम, ब्रिटेन, स्पेन और उत्तर और
मध्य इतालिया को ख़ास तौर पर तीव्र कष्ट भोगने पड़े, और
बलकान प्रायद्वीप को शायद इनसे भी अधिक कष्ट भोगने पड़े।
उस समय के इतिहास लेखक सब एक मत से बयान करते हैं कि
पूरब (यूनान इत्यादि) में और पच्छिम (इतालिया आदि) में
दुनियां पर एक समान वीरानी छा रही थी और इतिहास लेखकों
के अपने चित्तों पर निर्जनता और वीरानी का असर रह जाता था।
कोई कोई यह भी मानने लगे थे कि ईसाइयों के धर्म ग्रन्थों में
सृष्टि के जिस अन्त (क़यामत) की पेशीनगोई की गई है उसका
समय आ गया है।"*
यह कहानी अधिकांश यूरोप के ऊपर ईसा की पांचवीं, छठी और
सातवीं सदी के हमलों की है। आठवीं, नवीं और दसवीं सदी के इसी के
हमलों की बाबत इतिहास लेखक बुइसोनेद लिखता है—
"नवीं और दसवीं सदियों में नए हमलों ने पच्छिम यूरोप को
बरबादी से ढक लिया। स्केन्डिनेविया के डाकुओं ने, जिन्हें
'नॉर्थमैन' कहते थे' सन् ८३० से ९११ तक, क़रीब एक सदी
तक, वही जरमनों के से दुष्ट पराक्रम जारी रक्खे, उन्होंने जनता
- Life and Work in Meideval Europe, by P. Boissonade, book 1.
chapter, i, ii.