भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ पुस्तक प्रवेश
के अधीन था। इसके बाद एशिया की इन्हीं हमलावर क़ौमों ने यूरोप
पहुँच कर सारे रोमन साम्राज्य को तहस नहस कर डाला।
इङ्गलिस्तान के ऊपर चार सौ साल तक रोमन लोगों की हुकूमत रही।
उसके बाद ईसा की पाँचवीं सदी में इन्हीं एशियाई क़ौमों में से एक सैक्सन
ने, जिसका उत्पत्ति स्थान कहीं पर मध्य एशिया में समझा जाता है, रोमन
लोगों को निकाल कर बाहर किया, और इङ्गलिस्तान के असली बाशिन्दे
ब्रिटनों को अपने अधीन कर लिया। आज कल की अँगरेज़ क़ौम जो अपने
देश के अन्दर हर तरह आज़ाद है, इन्हीं ब्रिटनों, सैक्सनों और इसी तरह
की अनेक क़ौमों से मिल कर बनी हुई है।
इन हमलों से यूरोप की बरबादी
जब कि विशाल और बलवान रोमन साम्राज्य भी इन लगातार हमलों
का मुक़ाबला न कर सका, तो फिर बाक़ी यूरोप की हालत का केवल
अनुमान कर लेना ही काफ़ी है। ईसा की पाँचवीं सदी में हुण जाति ने,
जिसका ज़िक्र भारत के सम्बन्ध में ऊपर आ जा चुका है, कास्पियन समुद्र
और डेन्यूब नदी के बीच अपना एक स्वतन्त्र साम्राज्य क़ायम कर लिया था
और रोम के निर्बल सम्राट तक इन हुण सम्राटों को खिराज देते थे। इसी
तरह का इन लोगों का एक दूसरा साम्राज्य ईसा की पाँचवीं और छठी
सदियों में पच्छिमी यूरोप में भी क़ायम हो गया। इन हमलों के सबब से
यूरोपियन समाज की जो हालत हुई उसे बयान करते हुए एक फ़्रांसीसी
इतिहास लेखक बुइसोनेद लिखता है :—
“पुराने रोमन समाज की सबसे ऊपर की और बीच श्रेणियों के
लोग उस तूफ़ान में मिट गए, या हमला करने वाले असभ्य लोगों