भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपुराने हमले ५७
एशियाई क़ौमों के हमले ईसा से हज़ारों साल पहले से जारी थे। इनमें
आर्य्य जाति के हमले का ज़िक्र हम ऊपर कर चुके हैं। इसके बाद ईसा से
८०० साल पहले यूरोप पर अन्य एशियाई जातियों के हमलों का भी
यूरोपियन इतिहास में ज़िक्र आता है। वास्तव में इस तरह के हमले समय
समय पर बराबर होते रहे। किन्तु इस स्थान पर उन सब हमलों को छोड़
कर केवल हज़रत ईसा के जन्म के बाद के हमलों को ही थोड़े से शब्दों में
बयान कर देना चाहते हैं।
ईसा की दूसरी सदी से लेकर पूर्वीय एशिया और मध्य एशिया की
अनेक क़ौमें जैसे हुण, अबार, बलगार, ख़ज़ार, पत्ज़ेनाक, मगियार, मङ्गोल
इत्यादि बराबर अपनी एशियाई आबादियों से निकल निकल कर यूरोप
पर हमला करती रही हैं। इस तरह के हमले एक हज़ार साल तक, रूस
से लेकर जरमनी, इतालिया, इङ्गलिस्तान और स्पेन तक बराबर होते रहे।
इनमें शुरू की हमला करने वाली क़ौमों ने पूर्वी यूरोप और मध्य यूरोप में
जाकर अपनी बस्तियाँ आबाद कीं। बाद के हमला करने वालों ने इन पहले
आए हुए लोगों को उत्तर और पच्छिम की ओर भगा कर ख़ुद उनकी जगह
ले ली।
ये हमले तमाम यूरोप के ऊपर इतने लगातार और इतने अधिक देशों
पर हुए कि उन्हें एक दूसरे के बाद तरतीबवार बयान करना हमारे लिए
अनावश्यक है। इसलिए हम इन सब क़रीब एक हज़ार साल के हमलों का
सार यूरोपियन इतिहास लेखकों ही के शब्दों में दे देना चाहते हैं।
ईसा की पाँचवीं सदी में क़रीब एक चौथाई यूरोप, जिसमें यूनान,
बलकान, इतालिया, स्पेन और इङ्गलिस्तान—सब शामिल थे, रोमन लोगों