भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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थे उसे उन्होंने भारतीय बौद्ध चित्रकारी की सहायता से ख़ासी तरक्क़ी दी ।
इसी तरह बौद्ध चित्रकारी ने भी यूनानी चित्रकारी से उस समय कई नई
बातें सीखीं । ज्योतिष, विज्ञान, दर्शन और अन्य कलाओं में भी यूनानियों
ने भारतवासियों से और भारतवासियों ने यूनानियों से बहुत कुछ शिक्षा
ली । दोनों में खुले ब्याह शादियां होने लगीं । यहाँ तक कि उस समय के
बसे हुए 'यवन' ( यूनानी ) आज भारतवासियों में इस तरह घुल मिल
कर एक हो गए हैं कि उनका कहीं पता तक नहीं रहा ।
शक और हुण क़ौमों के हमले
इन यूनानियों के बाद जैसा हम अभी ऊपर कह चुके हैं, शक, पहलव
और हुण क़ौमों के हमलों का समय आता है । ये हमले भी बख्तियारी
यूनानियों के हमलों की तरह एक दरजे तक भारत पर सफल हमले कहे जा
सकते हैं, और ये क़ौमें भी ठीक उसी तरह भारत में आकर बस गईं जिस
तरह कि यवन बस गए थे ।
सिन्धु नदी के पच्छिम में गन्धार और पुष्कलावती और पूरब में तक्षशिला
हज़रत ईसा के जन्म की सदी में शक ( सीदियन ) जाति के शासन में आ
गए । पच्छिम पञ्जाब और सिन्ध के कुछ हिस्से पर कुछ दिनों के लिए शक
जाति की हुकूमत क़ायम हो गई । उसी सदी में पहलव ( पार्थियन ) क़ौम
के लोगों ने भी सिन्ध को विजय किया । इसके बाद इन लोगों ने दक्खिन
की ओर बढ़ना शुरू किया । किन्तु आन्ध्र कुल के सम्राटों ने कई संग्रामों में
इन पर विजय प्राप्त कर मध्य और दक्खिन भारत को उनके हमलों से बचाए
रक्खा । इसीलिए शक जाति के लोगों का शासन विन्ध्या तक ही रहा ।