भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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पहुँचे । ✡ इन हमलों के बाद मालूम होता है कि अनेक यूनानी भारत ही
में बस गए । शाकल (सियाल कोट) का राजा मिलिन्द, जिसका बौद्ध
ग्रन्थ 'मिलिन्द पन्ह' में ज़िक्र आता है, इन्हीं यूनानियों में से था ।
जो यूनानी भारत में बस गए थे उनका फिर किसी तरह का सम्बन्ध
यूनान या इराक़ इत्यादि से न रह गया । वे भारतवासियों के साथ मिल
जुल कर एक हो गए। उन्होंने भारत की भाषा, भारत के साहित्य, भारत
के धर्म, और भारत की सभ्यता को पूरी तरह अपना लिया । प्रसिद्ध बौद्ध
आचार्य नागसेन ने मिलिन्द को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी, और मिलिन्द भारत
के बड़े से बड़े धर्मनिष्ठ, न्यायप्रिय और प्रजापालक नरेशों में गिना जाता है,
जिसकी प्रजा अत्यन्त समृद्ध और खुशहाल थी ।
इसी तरह की दूसरी मिसाल यूनानी राजदूत हीलियोदोरस की है,
जिसने तक्षशिला से विदिशा (भीलसा) पहुंच कर वैष्णव मत स्वीकार
किया और वहीं पर श्रीकृष्ण की स्मृति में एक स्तम्भ खड़ा करवाया । † इस
स्तम्भ पर खुदे हुए लेख में हीलियोदोरस ने अपने को हीलियोदोर भागवत
लिखा है। हीलियोदोर का अर्थ सूर्य का उपासक है, और भागवत का अर्थ
भगवत का अनुयायी है ।
ये यूनानी जिस प्राचीन यूनानी चित्रकारी को अपने साथ भारत लाए
✡ कालिदास के नाटक 'मालविकाग्नि मित्र' में एक संग्राम का ज़िक्र
आता है जिसमें सिन्धु नदी के तट पर राजा पुष्यमित्र के पोते वसुमित्र
ने यवन सेना को परास्त कर पीछे हटाया । उस समय के संस्कृत ग्रन्थों
में 'यवन' शब्द से इन्हीं यूनानियों का मतलब है । Ibid, p. 512.
† The Cambridge History of India, p. 558.