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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 77

पुराने हमले ५१

ने पाँच सौ हाथी सेल्यूकस की भेंट किए और सेल्यूकस ने अफ़ग़ानिस्तान
की सरहद को पार कर अपने देश का रास्ता लिया।
चन्द्रगुप्त के पोते जगतप्रसिद्ध प्रियदर्शी सम्राट अशोक की मृत्यु के बाद
मौर्यकुल की सत्ता फिर कुछ निर्बल हुई। फिर एक यूनानी सेनापति
अन्ति ओकस ने हिन्दुकुश पर्वत को पार कर किसी छोटे से सरहदी भारतीय
नरेश के इलाक़े में प्रवेश किया। किन्तु वहाँ सिवाय अपनी फ़ौज के लिए
रसद और कुछ हाथियों के अन्ति ओकस को और कुछ न मिल सका और
इतने ही से सन्तुष्ट होकर अन्ति ओकस को भी सिन्धु नदी के उस पार से
ही पीछे लौट जाना पड़ा।
अन्ति ओकस के बाद भारत पर कुछ इस तरह के हमलों का ज़िक्र
किया जाता है जिन्हें सचमुच सफल हमले कहा जा सकता है। ये हमले दो
तरह के थे— (१) बख्तियारी यूनानियों के हमले और (२) शक (सीदियन)
हूण इत्यादि मध्य एशिया की अर्ध सभ्य क़ौमों के हमले।
यूनानियों का भारत में बस जाना
सिकन्दर के साथियों में से कुछ पश्चिम एशिया में बस गए थे। शुरू
में सिकन्दर ने इन्हें अपनी ओर से कुछ एशियाई प्रान्तों के शासक नियुक्त
कर दिया था। सिकन्दर की मृत्यु के कुछ समय बाद इन लोगों ने इराक़ में
और उसके आस पास एक सुन्दर सल्तनत क़ायम कर ली, जो बख्तियारी
सल्तनत के नाम से मशहूर हुई। इन बख्तियारियों ने सेल्यूकस की पराजय
को धोने के लिए सबसे पहले हिरात, अफ़ग़ानिस्तान और बलूचिस्तान को
फिर से विजय किया। इसके बाद सिन्धु नदी के इस पार इन लोगों के
हमले शुरू हुए। ये हमले पंजाब, सिन्ध और सौराष्ट्र (काठियावाड़) तक