भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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पर और भी कई हमले हुए, जिनमें कुछ असफल रहे और कुछ को सफलता
मिली । इन सफल हमलों की एक विशेषता यह थी कि जो लोग भारत के
किसी हिस्से को किसी तरह विजय कर पाते थे वे अपने पुराने देशों से हर
तरह का नाता तोड़ कर भारत ही में बस जाते थे, भारत ही को अपना घर
बना लेते थे, भारत के हित और भारत की उन्नति में अपना हित और
अपनी उन्नति समझने लगते थे और थोड़े ही दिनों के अन्दर शेष भारत-
वासियों में मिल जुल कर उनके साथ पूरी तरह एक हो जाते थे ।
सिकन्दर के बाद सबमे पहले दो हमले, जो असफल रहे, यूनानी
सेनापतियों सेल्युकस और अन्तियोकस के हमले थे ।
सिकन्दर के करीब २० साल वाद सिकन्दर के सेनापति और उत्तरा-
धिकारी सेल्युकस पहले ने भारत पर हमला किया । उस समय तक मौर्य
कुल के संस्थापक सम्राट चन्द्रगुप्त का राज समस्त उत्तरी भारत में क़ायम हो
चुका था । लिखा है कि चन्द्रगुप्त की लड़कपन में सिकन्दर से भेंट हो चुकी
थी । सेल्युकस के मुक़ाबले के लिए चन्द्रगुप्त ने पाँच लाख सेना और नौ
हज़ार हाथी मैदान में खड़े किए । सेल्युकस घबरा गया और दोनों में सन्धि
होगई । सेल्युकस ने चन्द्रगुप्त को सिन्धु नदी से पूरब के समस्त देश का
अधिराज स्वीकार किया, और इसके अलावा काबुल, कन्धार, हिरात और
बलूचिस्तान भी उसी के हवाले कर दिए । इस तरह अफ़ग़ानिस्तान और
बलूचिस्तान दोनों देश जिन पर २० साल पहले सिकन्दर ने अपने नायब
शासक नियुक्त कर दिए थे, अब चन्द्रगुप्त के भारतीय साम्राज्य में शामिल
होगए । यूनानियों की किताबों से यह भी पता चलता है कि चन्द्रगुप्त ने
सेल्युकस की लड़की के साथ शादी कर ली । इस सब के बदले में चन्द्रगुप्त