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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पुराने हमले ४७

उनमें से अधिकांश में भारत का अर्थ यही लिया जाता है । इस तरह उन
हमला करने वालों को भी, जिन्होंने कभी सिन्धु नदी का किनारा नहीं देखा
भारत के हमले करने वालों में शुमार किया जाता है । मसलन् कहा जाता
है कि ईरान के मशहूर बादशाह दारा के विशाल साम्राज्य में, जिसने ईसा
से ५२१ साल पहले से लेकर ४८६ साल पहले तक शासन किया, उत्तर भारत
का कुछ भाग भी शामिल था । किन्तु दारा के शिलालेखों से साफ़ पता
चलता है कि उसका साम्राज्य कभी सिन्धु नदी से आगे नहीं बढ़ा ।
सिकन्दर से पहले के हमले
आर्यों के हमले के बाद से सिकन्दर के हमले के समय तक भारत के
ऊपर सिन्धु नदी के इस ओर तक केवल दो हमलों का थोड़ा बहुत विश्वस्त
इतिहास मिलता है । इनमें पहला हमला असोरिया की जगत्प्रसिद्ध सम्राज्ञी
मलका सेमिरामिस का है, जिसने ईसा से क़रीब आठ सौ साल पहले
बलूचिस्तान को पार कर भारत विजय करने का प्रयत्न किया । इस हमले
की बाबत यूनानी इतिहास लेखक नियारकस लिखता है कि सेमिरामिस
को अपनी सेना के केवल बीस बचे हुए आदमियों सहित सिन्धु नदी से
जान बचा कर भागना पड़ा । दूसरा हमला ईरान के प्रसिद्ध विजेता कुरु का
था । यह वह कुरु था जिसे अंगरेज़ी में 'साइरस' लिखा जाता है किन्तु
जिसका असली ईरानी नाम कुरु था और जिसकी शुमार एशिया के बड़े से
बड़े विजेताओं में की जाती है । कुरु दारा का पितामह और विशाल ईरानी
साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है । काबुल से लेकर इराक़, शाम, टर्की,
बैबिलोन, मिश्र और कुछ भाग यूनान का भी इस ईरानी विजेता की
अधीनता स्वीकार कर चुका था । सेमिरामिस के बाद कुरु ने भारत पर