भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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इतिहासज्ञ स्वीकार करते हैं कि जिस आर्य्य जाति के लोग अपने मध्य
एशिया के आदि स्थानों से निकल कर अधिकांश यूरोपियन महाद्वीप के
ऊपर हज़ारों साल तक अर्धसभ्य अवस्था में रहते रहे, उसी जाति के लोगों
ने भारत में पहुँच कर, यूरोपियन विद्वानों के अनुसार ही, हज़रत ईसा से
कम से कम हज़ारों साल पहले एक विशाल, ऊँची और शानदार सभ्यता
की नींव रक्खी । इसकी एक वजह यह भी है कि आर्यों के आने से पहले
भी हिन्दोस्तान बिल्कुल असभ्य न था । प्राचीन संस्कृत साहित्य तक में हमें
भारत के उन आदिमवासियों की सभ्यता की उच्चता के अनेक सबूत मिलते
हैं और इस में भी सन्देह नहीं कि कई पहलुओं से उनकी सभ्यता नए
आने वाले आर्यों की सभ्यता से उच्चतर थी ।
भारत की उत्तर पच्छिमी सीमा
आर्यों के हमले के बाद भारत के ऊपर जो विदेशी हमले गिनाए जाते
हैं, उनकी असलियत को समझने के लिए हमें एक और बात ध्यान में
रखनी होगी । मध्य एशिया के दक्खिन में अफ़गानिस्तान, बलूचिस्तान
और उसके आस पास का कुछ प्रदेश ईसा से क़रीब एक हज़ार साल पहले
से लेकर औरंगज़ेब की मृत्यु के समय तक हिन्दोस्तान ईरान और उसके
पच्छिमी देशों के बीच विवाद ग्रस्त भूमि रहा है । भारत के अनेक हिन्दू और
मुसलमान सम्राटों ने भारत से बैठ कर सीस्तान, हिरात और अफ़गानिस्तान
पर हुकूमत की है । प्राचीन समय के अनेक ईरानी और यूनानी लेखकों ने
हिन्दोस्तान की सीमाएँ अफ़गानिस्तान और बलूचिस्तान के पच्छिम में
बयान की हैं और उस समस्त पहाड़ी प्रदेश को हिन्दोस्तान ही का अंग
माना है । आर्यों के हमले के बाद जो अनेक हमले भारत पर गिने जाते हैं