भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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हमला किया। किन्तु उसे भी केवल सात आदमियों सहित जान बचा
कर सिन्धु नदी से पीछे लौट जाना पड़ा, और अन्त में किसी भारतवासी
के वार से ज़ख़्मी होकर ही उसकी मृत्यु हुई।”*
सिकन्दर का हमला
इसके बाद ईसा से ३२६ साल पहले यूनान के जगत प्रसिद्ध विजेता
सिकन्दर के भारत पर हमले का समय आता है। पश्चिमी यूरोप से लेकर
अफ़ग़ानिस्तान और बलूचिस्तान तक कोई मुल्क इस अलौकिक विजेता की
सेना के सामने न ठहर सका। उत्तर-पश्चिम की ओर से आकर सिकन्दर ने
अपनी सेना सहित सिन्धु और झेलम नदियों को पार किया। सिकन्दर को
पूरी उम्मीद थी कि वह उत्तर भारत के हरे भरे मैदानों को अपने विशाल
साम्राज्य में मिला कर भारतीय महाद्वीप को पार कर पूर्वीय सागर तक जा
पहुंचेगा। भारत की राजनैतिक हालत भी उस समय सिकन्दर के सौभाग्य से
काफ़ी बिगड़ी हुई थी, सरहद के ऊपर झेलम के उस पार तक्षशिला के राजा
और इस पार पञ्जाब के राजा पौरव में, जिसे यूनानी पोरस कहते थे, बहुत
दिनों से दुश्मनी चली आती थी। तक्षशिला का राजा अपने प्रतिस्पर्धी पौरव
के ख़िलाफ़ सिकन्दर से मिल गया। सिकन्दर ने पौरव से अधीनता स्वीकार
कराने के लिए उसके पास दूत भेजे। पौरव ने दूतों को उत्तर दिया कि मैं
अपनी सेना सहित युद्ध के मैदान में सिकन्दर और उसकी सेना के साथ बात
चीत करूँगा। सिकन्दर की जिस सेना ने झेलम को पार कर पौरव पर
हमला किया उसमें तक्षशिला के राजा की भारतीय सेना भी शामिल थी।+
- The Cambridge History of India, vol. i, pp. 330-31.
- The Cambridge History of India, vol. i, p. 361.