सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 720, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 720

वेल्सली और निज़ाम ४४१
छै साल पहले निज़ाम और अंगरेज़ों के बीच मित्रता की सन्धि हो
चुकी थी। उस सन्धि को मिट्टी में मिलाकर अब गवर्नर जनरल ने
रेज़िडेण्ट को आज्ञा दी कि जिस तरह हो सके किसी गुप्त ढंग से
निज़ाम की रियासती सेना को, जिसमें फ्रांसीसी अफ़सर हैं,
बरख़ास्त करवा कर उसकी जगह कम्पनी की नई सबूसीडीयरी
सेना एक बार क़ायम कर दो। इस पत्र में कप्तान कर्कपैट्रिक को
आदेश दिया गया कि यह सारा काम चुपचाप ऊपर ही ऊपर वज़ीर
अज़ीमुलउमरा की मार्फ़त पूरा करा लिया जावे और निज़ाम को
इसका बिल्कुल पता न चलने पावे। वेल्सली ने लिखा—
"× × × अज़ीमुलउमरा पर खूब ज़ोर देना कि इसकी पूरी पूरी
अह्तियात रखना ज़रूरी है कि × × × तजवीज़ें खुलने न पावें; उसे यह
सुझा देना कि सेना को छोटे छोटे टुकड़ों में करके एक एक टुकड़े को अलग
अलग बरख़ास्त करना अधिक उचित होगा, ताकि अन्त में आसानी से सारी
सेना को ख़तम किया जा सके और सेना के अफ़सर या सिपाही वहाँ से जाकर
टीपू या सींधिया के यहाँ नौकरी न कर लें।
"जब अज़ीमुलउमरा निज़ाम के नाम पर इन सब बातों को करने के
लिए राज़ी हो जावे तब तुम मद्रास से कम्पनी की सेना बुलवा भेजना।"*

  • “ . . . . . you will urge to Azimul Omra in the strongest terms,
    the necessity of his taking every precaution to prevent the propositions
    . . . . . from transpiring, and you will suggest to him the propriety of
    dispersing the corps in small parties for the purpose of facilitating its final
    reduction, and of preventing the officers and privates from passing into the
    service of Tipoo or of Scindhia.
    "Should Azimul Omra consent, in the name of the Nizam, to the