सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 719, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 719

४४० भारत में अंगरेज़ी राज

वह कम्पनी के डाइरेक्टरों के सामने पेश हुआ। परीक्षा के तौर पर
एक डाइरेक्टर ने उससे पूछा—"क्यों छोटे आदमी, यदि हैदरअली
तुम्हें मिल जावे तो तुम क्या करोगे?" लड़के ने फ़ौरन उत्तर
दिया—"क्या करूँगा? मैं फ़ौरन अपनी तलवार खींचकर उसका
सर काट डालूँगा।" डाइरेक्टर ने कहा—"बहुत ठीक" और फिर
आज्ञा दी—"इसे पास किया गया।"
इस प्रकार पास होकर और सेना में भरती होकर अप्रैल सन्
१७८३ में १३ साल की आयु में मैलकम मद्रास पहुँचा। टीपू के
साथ अंगरेज़ों की पहली लड़ाई में वह शामिल था। धीरे धीरे
उसने फ़ारसी भाषा और देशी रियासतों की हालत का ख़ूब
अध्ययन किया। मार्किस वेल्सली मद्रास में मैलकम से मिलकर
बड़ा प्रसन्न हुआ। २० सितम्बर सन् १७९८ को उसने कप्तान मैलकम
को सेना से निकाल कर हैदराबाद के दरबार में कर्कपैट्रिक का
असिस्टैण्ट नियुक्त कर दिया। मैलकम कर्कपैट्रिक और वेल्सली
दोनों के लिए अत्यन्त उपयोगी साबित हुआ।
तजवीज़ यह थी कि अज़ीमुलउमरा बिना निज़ाम को ख़बर
[हाशिया: अज़ीमुलउमरा के साथ गुप्त साज़िश] किए रियासत की सेना को चुपचाप टुकड़े
टुकड़े करके बरख़ास्त कर दे और पेशतर इसके
कि निज़ाम को ख़बर हो, कम्पनी की नई
सबसीडीयरी सेना हैदराबाद पहुँच कर उसकी जगह ले ले। ८
जुलाई सन् १७९८ को वेल्सली ने कलकत्ते से कप्तान कर्कपैट्रिक के
नाम एक पत्र लिखा जिसके ऊपर "गुप्त" लिखा हुआ था। केवल