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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पुराने हमले ४२
इस संक्षिप्त बयान से पाठकों को मालूम हो जायगा कि इस तरह के हमले
भारत पर अन्य देशों की निस्बत अधिक नहीं हुए और न उन्हें भारत में
अधिक सफलता ही प्राप्त हुई। इन हमलों के समय अपनी रक्षा न कर
सकने के स्थान पर भारत ने ऐसे अवसरों पर यूरोपियन देशों के मुक़ाबले में
कहीं अधिक सफलता के साथ अपनी रक्षा की और अक्सर अपने हमला
करने वालों पर भौतिक और नैतिक दोनों तरह से विजय प्राप्त की।
आर्यों का हमला
भारत के ऊपर सब से पहला विदेशी हमला आर्य जाति का हमला
बताया जाता है, जिसका समय यूरोपीय विद्वानों के अनुसार ईसा से क़रीब
२,५०० साल पहले* था।
समस्त इतिहास लेखक इस बात को स्वीकार करते हैं कि आजकल के
भारतवासी, ईरानी और यूरोपनिवासी सब उसी प्राचीन आर्य जाति की
सन्तान हैं। कहा जाता है कि आज से चार पाँच हज़ार साल पहले या
कुछ ज़्यादा इन आर्य जाति के लोगों ने मध्य एशिया के किसी हिस्से से
निकल निकल कर हिन्दोस्तान, ईरान और तमाम यूरोप को विजय और
आबाद किया था। इसलिए यदि उस प्राचीन आर्य जाति द्वारा विजय
किया जाना किसी देश के लिए भी ज़िल्लत की चीज़ माना जा सकता है तो
वह हिन्दोस्तान के लिए केवल उतनी ही ज़िल्लत की चीज़ हो सकता है,
जितना ईरान, रूस, जरमनी, फ्रान्स, इंगलिस्तान, यूनान, रोम इत्यादि के
लिए, जिनकी भाषा और जिनकी सभ्यता पर प्राचीन आर्यों की भाषा और
सभ्यता की वैसी ही गहरी छाप पड़ी जैसी भारत में। इतना ही नहीं, बल्कि

  • The Cambridge History of India, vol. i, p. 697.