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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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वेल्सली और निज़ाम ४३६
इस 'अधिक गहरे सम्बन्ध' से वेल्सली का मतलब सबूसीडीयरी
सन्धि से है।
निज़ाम को 'सबूसीडीयरी सन्धि' के जाल में फाँसने के लिए
[हैदराबाद के] हैदराबाद के दरबार में एक गुप्त षड्यन्त्र रचा
[दरबार में दो] गया। निज़ाम के कुछ दरबारियों को, जिनमें
[अंगरेज़ दूत] निज़ाम का वज़ीर अज़ीमुलउमरा भी था,रिश्वतें
देकर अपनी ओर फोड़ा गया, और निज़ाम
से यह सारा मामला अन्त समय तक छिपाकर रक्खा गया। इस
षड्यन्त्र में वेल्सली के दो मुख्य मदद्गार थे, एक मेजर कर्कपैट्रिक
का छोटा भाई कप्तान कर्कपैट्रिक, जो अपने बड़े भाई की जगह
हैदराबाद में रेज़िडेण्ट था, और दूसरा कप्तान कर्कपैट्रिक का
असिस्टेण्ट कप्तान मैलकम।
कप्तान कर्कपैट्रिक बहुत ही चलता पुर्ज़ा था। उसने अपना
रहन सहन, पहनाव सब हिन्दोस्तानी ढङ्ग का कर रक्खा था।
हैदराबाद में उसका नाम 'हशमतजङ्ग' पड़ा हुआ था। एक
मुसलमान दरबारी की लड़की के साथ उसने बाज़ाब्ता निकाह कर
लिया था। हैदराबाद ही में अनेक बार उस पर रिश्वतसितानी,
बदचलनी और हत्या तक के जुर्म लगाए गए। हिन्दोस्तानी
दरबारियों के साथ साज़िशें करने में वह सिद्धहस्त था और इस
अवसर पर वेल्सली को उसने बड़ा काम दिया।
दूसरा कप्तान मैलकम स्कॉटलैण्ड के निहायत ग़रीब माँ बाप
का लड़का था। १२ साल की आयु में भारत भेजे जाने के लिए