सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 717, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 717

४३८ भारत में अंगरेज़ी राज

की इस सेना को तोड़ कर उसकी जगह कम्पनी की एक नई
सबसीडीयरी सेना निज़ाम के राज में क़ायम कर दे । दूसरे शब्दों
में वेल्सली ने सब से पहले निज़ाम को 'सबसीडीयरी सन्धि' के
जाल में फँसाने की तजवीज़ की ।
निज़ाम की हालत पहले ही काफ़ी गिरी हुई थी । कुर्दला की
पराजय ने उसे और भी कमज़ोर कर दिया था ।

[हाशिया:]
निज़ाम को
सब्सिडीयरी संधि
के जाल में फंसने
की तजवीज़

मालूम होता है, कुर्दला में अंगरेज़ों के निज़ाम
को मदद न देने और उसकी सबसीडीयरी सेना
तक को उससे दूर रखने का असली मतलब यह
था कि अंगरेज़ निज़ाम को जहाँ तक हो सके,
कमज़ोर कर देना चाहते थे । वेल्सली ने डरडास को लिखा :—
“मैं अभी लिख चुका हूँ कि x x x कुर्दला की सन्धि से और जिस
ढङ्ग से उस सन्धि का पालन कराया गया है, उससे निज़ाम की हालत
कितनी गिर गई है और कितनी कमज़ोर हो गई है । x x x
“इस समय मालूम होता है कि हैदराबाद का दरबार हमारे साथ अधिक
गहरा सम्बन्ध क़ायम करने के लिए बड़ी बड़ी कुर्बानियाँ करने को तैयार है ।
और यदि किसी दूसरे सबब से इस सम्बन्ध को अनुचित न समझा जावे;
तो बजाय इसके कि हम अपनी ओर से पत्र व्यवहार शुरू करें और निज़ाम
से कहें कि तुम अपनी सेना के किसी हिस्से को बरखास्त कर दो, यदि
निज़ाम हमसे प्रार्थना करे और हम उस पर बतौर एक अहसान के उसके साथ
इस तरह के सम्बन्ध को मंजूर करें तो शायद हमें बहुत अधिक लाभ हो
सकता है ।”