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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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चौदवाँ अध्याय
वेल्सली और निज़ाम
आशा अन्तरोप से वेल्सली ने इंगलिस्तान के मन्त्री डण्डास
[हाशिया: इंगलिस्तान के] के नाम दो ख़ास पत्र लिखे, एक २३ फ़रवरी
[हाशिया: मन्त्री के नाम] सन् १७९८ को और दूसरा २८ फ़रवरी को ।
[हाशिया: वेल्सली के पत्र] इनमें से पहले पत्र में वेल्सली ने लिखा :—
“ × × × हमें सबसे बड़ा लाभ इस समय इस
बात में है कि देशी नरेश एक दूसरे के साथ अपनी दोस्ती या दुश्मनी का
फ़ैसला तक नहीं कर सकते ।”*
इस वाक्य में तीन ख़ास देशी शक्तियों की ओर इशारा था,

  • “Bear in mind the state of the native powers in India at this moment;
    and recollect that the greatest advantage which we now possess is the
    present deranged condition of those interests.”—Marquess Wellesley to
    Mr. Dundas 23rd February, 1798.