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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 714

अंगरेज़ों की साम्राज्य पिपासा ४३५

किया, इन सब बातों का विस्तृत बयान अलग अलग अध्यायों में
किया जावेगा ।
इस अध्याय को समाप्त करने से पहले केवल एक बात हम
[ईसाई धर्म प्रचार] और बता देना चाहते हैं । वह यह कि मार्किस
वेल्सली के शुद्ध राजनैतिक उद्देश के अलावा
उसका एक उद्देश भारत में ईसाई धर्म का प्रचार करना भी था ।
वेल्सली ने भारत आते ही ईसाई धर्म के अनुसार अंगरेज़ी
इलाके के अन्दर रविवार की छुट्टी का मनाया जाना जारी किया ।
उस दिन समाचार पत्रों का छपना इक क़ानूनन् बन्द कर दिया ।
कलकत्ते के फ़ोर्ट विलियम में उसने एक कॉलेज की स्थापना की ।
इस कॉलेज का एक उद्देश विदेशी सरकार के लिए सरकारी नौकर
तैयार करना था । वेल्सली के जीवन चरित्र का रचयिता आर०
आर० पीयर्स साफ़ लिखता है कि यह कॉलेज भारतवासियों में
ईसाई धर्म को फैलाने का भी एक मुख्य साधन था । इस कॉलेज
के ज़रिये भारत की सात भिन्न भिन्न भाषाओं में इंजील का अनुवाद
करा कर उसका भारतवासियों में प्रचार कराया गया । मार्किस
वेल्सली न अपने व्यक्तिगत जीवन में चरित्रवान था और न
सार्वजनिक जीवन में अपने से पहले के किसी गबरनर जनरल से
अधिक ईमानदार था, फिर भी उसकी इस ईसाई धर्मनिष्ठा के
लिए अंगरेज़ इतिहास लेखक प्रायः उसकी प्रशंसा करते हैं । सच
यह है कि उसका ईसाई धर्म प्रचार भी राजनैतिक इष्ट सिद्धि का
एक साधन मात्र था ।