भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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रखने का इससे सुन्दर उपाय न सोचा जा सकता था। इस 'सब्सिडी-
डीयरी एलायन्स' के विषय में एक यूरोपियन विद्वान लिखता है:—
“सब्सिडीयरी एलायन्स × × × सिवाय एक धोखे के और कुछ न थी।
उसका उद्देश इङ्गलिस्तान की जनता की आँखों में धूल डालना था × × ×।
“× × × ये देश ज़ाहिरा विजय नहीं किए जाते थे, वहाँ के नरेशों
को छत्र, चँवर आदिक राजत्व के समस्त चिन्हों सहित तख़्त पर रहने
दिया जाता था, किन्तु असली ताक़त उनके हाथों से लेकर एक पोलिटिकल
एजण्ट के हाथों में दे दी जाती थी × × ×।”*
इस तजवीज़ का उद्देश 'इंग्लिस्तान की जनता की आँखों में
धूल डालना' रहा हो या न रहा हो, इसमें सन्देह नहीं कि उस समय
के असंख्य भोले एशिया निवासियों की आँखों में धूल डालने के
लिए यह काफ़ी साबित हुई ।
जिन छलों द्वारा वेल्सली ने भारत में अपने सबसीडीयरी एला-
यन्स का जाल बिछाया, जिस प्रकार उसने भारत के मुसलमानों
और मराठों को वश में किया, निज़ाम और पेशवा को फाँस कर
उन्हें कम्पनी का क़ैदी बनाया, करनाटक के नवाब, तञ्जोर के राजा,
अवध के नवाब वज़ीर और सूरत और फ़र्रुख़ाबाद के नवाबों के
इलाक़े छीने और टीपू, सींधिया, होलकर और भोंसले को बरबाद
- "The Subsidiary system. . . . was nothing more than a delusion;
it was for the purpose of throwing dust into the eyes of the British public....
" . . . these countries were not ostensibly conquered; the sovereign
was allowed to remain on his throne, with all the trappings of royalty, but
substantial power was transferred from him to the person of a political
agent,"—Asiatic Quarterly Review for January 1887.