भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअंग्रेज़ों की साम्राज्य पिपासा ४३३
से फ्रांसीसियों को निकलवाकर उनकी जगह अंग्रेज़ भरती कराने
में मेजर कर्कपैट्रिक का ख़ास हाथ था।
इन दोनों अंग्रेज़ों से वेल्सली को देशी रियासतों की स्थिति
का ठीक ठीक पता चल गया और अपनी तजवीज़ों को पक्का करने
में बहुत बड़ी मदद मिली। आशा अन्तरीप से वेल्सली ने प्रधान
मन्त्री पिट और भारत मन्त्री डण्डास के नाम जो पत्र इंगलिस्तान
भेजे, उनसे साफ़ ज़ाहिर हो जाता है कि इंगलिस्तान के शासकों
ने वेल्सली को क्या क्या हिदायतें दी थीं और भारत पहुँच कर
उसकी क्या तजवीज़ें थीं।
एक ख़ास तजवीज़ इस समय यह की गई कि भारतीय नरेशों
सबसीडीयरी के पास उस समय तक जहाँ जहाँ अपनी
एलाएन्स स्वतन्त्र सेनाएँ मौजूद थीं, उन सेनाओं को एक
एक कर किसी प्रकार बरखास्त करा दिया
जावे; उन नरेशों और उनकी रियासतों की रक्षा का भार कम्पनी
अपने ऊपर ले ले; और पुरानी रियासती सेनाओं की जगह कम्पनी
की सेनाएं, अंग्रेज़ अफ़सरों के अधीन, रियासतों के ख़र्च पर
उन रियासतों में क़ायम कर दी जावें। इस नई तजवीज़ का नाम
'सबसीडीयरी एलाएन्स' रक्खा गया। 'सबसीडी' का अर्थ
'आर्थिक सहायता' और 'एलाएन्स' का अर्थ 'मित्रता' है। मतलब
यह था कि हर देशी नरेश कम्पनी को निश्चित 'आर्थिक सहायता'
देकर कम्पनी की 'सैनिक मित्रता' लाभ कर सके। निस्सन्देह देशी
नरेशों को उनकी रियासतों के अन्दर उन्हीं के ख़र्च पर क़ैद करके
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