भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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दरबारों में फ़्रांसीसियों, उनके देश और उनके विचारों को बदनाम
करने की हर तरह कोशिश करता रहता था। वेल्सली को भी
फ़्रांसीसी क़ौम और फ़्रांसीसी विचारों से हद दर्जे का द्वेष था।
इसकी एक वजह यह भी बताई जाती है कि इंगलिस्तान में वेल्सली
ने एक फ़्रान्सीसी स्त्री अपने घर में रख रक्खी थी, जिससे वेल्सली
के कई बच्चे हुए। बच्चे होने के बाद वेल्सली ने उसके साथ
बाज़ाब्ता विवाह किया, किन्तु बाद में दोनों में कुछ अनबन हो गई
और उस स्त्री ने वेल्सली के साथ भारत आने से इनकार कर
दिया। जो हो, वेल्सली फ़्रांसीसियों से इतना डरता था कि भारत
आते ही उसने ४ मई सन् १७९८ को यहाँ के जंगी लाट सर
आल्फ्रेड क्लार्क को एक “प्राइवेट और गुप्त” पत्र द्वारा यह साफ़
साफ़ आदेश दिया कि—कलकत्ता, चट्टग्राम, चन्द्रनगर, चुंचड़ा
इत्यादि से और बाक़ी तमाम ब्रिटिश भारतीय इलाक़ों से एक एक
फ़्रांसीसी को और फ़्रांसीसियों से सम्बन्ध रखने वाले समस्त अन्य
यूरोप निवासियों तक को चुन चुनकर ज़बरदस्ती यूरोप भेज दिया
जाय। मार्किस वेल्सली प्रजा के अधिकारों का इतना पक्का विरोधी
था और उसके राजनैतिक विचार इतने अनुदार थे कि स्वयं अपने
देश इंगलिस्तान के अन्दर वह मामूली पार्लिमेण्ट के सुधारों तक
के ख़िलाफ़ था।
पिट के समय तक आयरलैंड की एक अलग पार्लिमेण्ट थी।
पिट ने इस उद्देश से कि आयरलैंड को इंगलिस्तान के राज्य में मिला