भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअंगरेज़ों की साम्राज्य पिपासा ४३१
लिया जाय और इंगलिस्तान की पार्लिमेण्ट के मातहत कर दिया
[आयरलैण्ड की स्वाधीनता का अपहरण] जाय, जान बूझ कर आयरलैंड में सशस्त्र विद्रोह
खड़ा कर दिया। प्रसिद्ध अंगरेज़ विद्वान डब्ल्यू०
टी० स्टेड ने उस समय के ऐतिहासिक लेखों
से साबित किया है कि आयरलैंड का सन् १७६८
का विद्रोह ब्रिटिश सरकार का उकसाया हुआ था और आयरलैंड
की स्वाधीनता छीनने के उद्देश से किया गया था। स्टेड यह भी
लिखता है कि जिन उपायों से इंगलिस्तान के शासकों ने आयरलैंड
की स्वाधीनता छीन कर उसे इंगलिस्तान की पार्लिमेण्ट के मातहत
किया, उनमें एक उपाय आयरलैंड की स्त्रियों के साथ "बेरोक टोक
बलात्कार" ("Free-rape") भी था। ये उपाय थे जिनके ज़रिये
'ब्रिटेन' का नाम 'ग्रेट ब्रिटेन' रक्खा गया।
मार्किस वेल्सली ने २ अक्टूबर सन् १८०० ई० को कलकत्ते से
[भारत में मार्किस वेल्सली का उद्देश] अपने एक मित्र के नाम पत्र लिखा जिसके नीचे
लिखे वाक्य से उसके और कम्पनी के दोनों के
भारतीय शासन के उद्देश का साफ़ पता चलता
है। इस पत्र में वेल्सली ने लिखा :—
“ × × × मैं बादशाहतों के ढेर लगा दूँगा और फ़तह पर फ़तह तथा
मालगुज़ारी पर मालगुज़ारी लाद दूँगा। मैं इतनी शान, इतना धन और
इतनी सत्ता इकट्ठी कर दूँगा कि एक बार मेरे महत्त्वाकांक्षी और धनलोलुप
मालिक भी 'त्राहि त्राहि' चिल्लाने लगेंगे। × × ×” ❀
- "I will heap Kingdoms upon Kingdoms, victory upon victory,