भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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लखनऊ पहुँच कर बाज़ाब्ता तहक़ीक़ात (?) करके वजह यह
बताई गई कि वज़ीरअली की पैदाइश नाजायज़ है (!) ।
२१ फ़रवरी सन् १७६८ को १७ शर्तों की एक सन्धि सआदत
अली और सर जॉन शोर के बीच लिखी गई। मुख्य शर्तें ये थीं:—
“x x x सआदतअली कम्पनी की बक़ाया अदा करे, इलाहाबाद का
क़िला कम्पनी को दे दे और उसकी मरम्मत के लिए आठ लाख रुपए दे,
फ़तहगढ़ के क़िले की मरम्मत के लिए तीन लाख रुपए दे, फ़ौजों के इधर
से उधर आने जाने का ख़र्च दे—कितने लाख, यह बाद में तय किया जावेगा
सआदतअली को नवाब वज़ीर बनाने में कम्पनी का जो ख़र्च हुआ है उसके
लिए वह कम्पनी को बारह लाख रुपए दे, पदच्युत वज़ीरअली को डेढ़ लाख
रुपए की पेन्शन दे, x x x और सबसीडीयरी सेना के ख़र्च के लिए ५६
लाख सालाना की रक़म को बढ़ा कर ७६ लाख कर दिया जावे।”*
मेजर बर्ड लिखता है कि इस तरह “कुल मिला कर दस लाख
पाउण्ड (१ करोड़ रुपए से ऊपर) और इलाहाबाद का क़िला एक
साल के अन्दर कम्पनी को मिल गया।”*
एक शर्त यह भी थी कि सिवाय कम्पनी के आदमियों के और
कोई यूरोपियन आइन्दा अवध के राज में रहने न पावे।
इस समस्त सन्धि में शुरू से आख़ीर तक केवल 'रुपयों' और
Ali's birth, that prince was deposed and Saadat Ali was proclaimed, in his
stead, at Lucknow, on the 21st January, 1798--Dacoitee in Excelsis; or the
Spoliation of Oudh, by the East India Company,—by Major Bird, Assistant
Resident at Lucknow.
- Dacoitee in Excelsis, pp. 35-38.