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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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सर जॉन शोर ४१३
हो गया है कि यशोदाबाई एक लड़के को गोद ले, केवल लड़के का
पसन्द किया जाना बाक़ी है। मैलेट को इस पर एतराज़ करने का
कोई हक़ न था। परन्तु नाना का मैलेट को समय से पहले अपनी
तजवीज़ बता देना ही एक भयंकर भूल साबित हुई।
बाजीराव उस समय क़ैद में था। मैलेट को सूचना मिलते ही
बाजीराव को ख़बर हो गई। मैलेट, बाजीराव और उसके अन्य
साथियों की साज़िशों का नतीजा यह हुआ कि नाना की तजवीज़
पूरी होने से पहले ही बाजीराव क़ैद से निकल आया और नाना
की इच्छा के ख़िलाफ़ बाजीराव के पक्ष वालों ने उसके पेशवा होने
का एलान कर दिया। बाजीराव मसनद पर बैठ गया, और बैठते
ही उसने महाराष्ट्र मण्डल के सच्चे हितचिन्तक नाना फड़नवीस
के साथ वह शत्रुता निकाली, जिसके सबब से नाना को
पहले जान बचा कर भागना पड़ा और फिर कई साल क़ैद में
काटने पड़े।
बाजीराव कायर और निर्बल साबित हुआ। नाना फड़नवीस
की पेशीनगोई उसके विषय में बिल्कुल सच्ची निकली। बाजीराव
आख़िरी पेशवा था और उसके मसनद पर बैठने के साथ
ही साथ मराठा साम्राज्य के गौरव का अन्त हो गया।
बाजीराव की अयोग्यता से अंगरेज़ों ने जिस तरह लाभ उठाकर
भारत से पेशवा सत्ता का सदा के लिए अन्त कर दिया, उसका
बयान एक दूसरे अध्याय में दिया जायगा।
निज़ाम के साथ भी सर जॉन शोर का व्यवहार न्याय या