भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसर जॉन शोर ४०६
अपने बङ्गाल के खिराज के सम्बन्ध में पत्र लिखे हैं और उनसे
मदद चाही है। माधोजी सींधिया की हत्या से कम्पनी के रास्ते
का एक ज़बरदस्त काँटा दूर हो गया।
उस समय के सरकारी पत्र व्यवहार में दोनों बातें बिलकुल
साफ़ हैं। एक यह कि अंगरेज़ों ने होलकर को सींधिया पर
हमला करने के लिए उकसाया और दूसरे यह कि अंगरेज़ माधोजी
सींधिया के विरुद्ध साज़िशें कर रहे थे। जिस समय माधोजी अपने
राज से पूना की ओर रवाना हुआ, उसी समय गवरनर जनरल
ने सींधिया दरबार के अंगरेज़ रेजिडेंट को वहाँ से वापस
बुला लिया।
माधोजी की मृत्यु के समय कॉर्नवालिस इंगलिस्तान में था
और सर जॉन शोर भारत में गवरनर जनरल था। कॉर्नवालिस को
जब माधोजी की मृत्यु का समाचार मिला, उसने ७ सितम्बर सन्
१७६४ को प्रसन्न होकर सर जॉन शोर को लिखा—"सींधिया की
मृत्यु से आपकी गवरमेंट की क़रीब क़रीब हर राजनैतिक कठिनाई
दूर हो जावेगी।”*
इससे अधिक सुबूत इस बात का और क्या हो सकता है कि
माधोजी की मृत्यु वास्तव में कौन चाहता था और उसकी हत्या
करने वालों को किसने नियुक्त किया था।
- "The death of Scindhia, . . . will nearly remove every political
difficulty of your Government," - Cornwallis' letter to Sir John Shore,
September 7, 1794.