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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 687

४१० भारत में अंग्रेज़ी राज
कम्पनी के रास्ते का दूसरा ज़बरदस्त काँटा नाना फड़नवीस
पेशवा माधोराव अभी मौजूद था। माधोजी सींधिया की हत्या
नारायण की मृत्यु के बाद महाराष्ट्र के अन्दर नाना और उसकी
नीति की क़द्र और अधिक बढ़ गई। चार्ल्स
मैलेट ने पूना से एक पत्र में लिखा कि—"जब तक पूना दरबार में
नाना का ज़ोर है, तब तक मराठा राज के अन्दर मज़बूती से अपने
पैर जमा सकने की हमें (अंग्रेज़ों को) सपने में भी आशा नहीं
करनी चाहिए।"*
नाना फड़नवीस के ख़िलाफ़ अंग्रेज़ों ने कई बार साज़िशें कीं,
किन्तु सफलता न मिल सकी। पेशवा माधोराव नारायण पूरी तरह
नाना के कहने में था। बिना उसे मसनद से हटाए कम्पनी को
अपनी इच्छा पूरी करने के लिए अनुकूल अवसर न मिल सकता
था। २७ अक्तूबर सन् १७९५ को कम्पनी के सौभाग्य से पेशवा
माधोराव दूसरा (माधोराव नारायण) अपने महल के छज्जे से
गिर कर मर गया। इस पेशवा की मृत्यु के सम्बन्ध में ग्रांट डफ़
लिखता है कि—"२५ अक्तूबर को सवेरे पेशवा जान बूझकर अपने
महल के एक छज्जे से कूद पड़ा, उसके दो अंगों की हड्डियाँ टूट गईं
और एक फ़व्वारे की नली से, जिसके ऊपर वह आकर पड़ा, वह
बहुत ज़ख़्मी हो गया। इसके बाद वह केवल दो दिन जिया।"†

  • "As long as Nana remained Supreme at the Poona Court they (the
    British) should never dream of obtaining a firm footing in the Marhatta
    Kingdom." - Charles Malet.
    † Grant Duff's History of the Marhattas, p. 521.