भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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गिरोह को इस कार्य के लिए नियुक्त किया था।” और कीन की
राय है—“निस्सन्देह माधोजी की मौत चाहने के लिए नाना के
पास काफ़ी वजह थी।”
इसमें सन्देह नहीं माधोजी सींधिया को मरवा डाला गया।
किन्तु नाना पर उसका दोष मढ़ना साफ़ झूठ और अन्याय है।
न नाना के पास उस समय “माधोजी की मौत चाहने के लिए कोई
वजह थी” और न नाना का चरित्र इस ढङ्ग का था। इसके ख़िलाफ़
अंगरेज़ों के पास “माधोजी की मौत चाहने के लिए निस्सन्देह
काफ़ी वजह थी।” और मैलेह और मॉस्टिन दोनों की राशि भी
एक थी। ग्रांट डफ़ साफ़ लिखता है :—
“सींधिया की शक्ति और उसकी महत्त्वाकाँक्षा, उसका पूना जाना और
सबसे बढ़ कर देश वासियों में आम तौर पर उसकी इज़्ज़त, इन सब बातों
से अंगरेज़ माधोजी पर शक करने लगे थे; इसलिए अंगरेज़ों के काग़ज़ों में
हमें इस बात के बार बार सबूत मिलते हैं कि वे माधोजी की हरकतों को बड़े
ग़ौर और जलन के साथ देख रहे थे।”*
ग्रांट डफ़ से ही यह भी पता चलता है कि माधोजी के पूना
माधोजी की हत्या पहुँचने के बाद ही दिल्ली के एक हिन्दोस्तानी
से अंगरेज़ों को अख़बार में एक लेख निकला था कि दिल्ली के
लाभ सम्राट ने पेशवा और माधोजी दोनों के नाम
- " . . . . his power and ambition, his march to Poona, and above
all, the general opinion of the country, led the English to suspect him ; and
we accordingly find in their records various proofs of watchful jealousy ;
. . . . ."—Grant Duff.