भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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चाहिए, यदि उन्हें पैर रखने की जगह मिल गई तो सारा देश ख़तरे में पड़
जावेगा।"
माधोजी को अब नाना के ये शब्द बार बार याद आते थे।
वह अपने पिछले कृत्यों पर पछता रहा था और कम्पनी से शाही
खिराज वसूल करने के सम्बन्ध में सम्राट के पत्रों पर और इस
सारी स्थिति पर नाना से सलाह करने के लिए पूना आया हुआ
था। दिल्ली के सम्राट, माधोजी सिंधिया और पेशवा, तीनों में इस
प्रकार मेल हो जाना और माधोजी का तीनों की ओर से सेना
लेकर शाही खिराज वसूल करने के लिए कलकत्ते पर चढ़ाई करना
उस समय कम्पनी के लिए अत्यन्त आपत्तिजनक हो सकता था।
जब कि माधोजी सिंधिया पूना में पेशवा और नाना फड़नवीस
के साथ सलाहें कर ही रहा था, फ़रवरी सन्
[माधोजी सिंधिया] १७६४ को पूना के निकट वनौरी नामक स्थान
[की हत्या] पर अचानक माधोजी सिंधिया की मृत्यु होगई।
इतिहास लेखक ग्राण्ट डफ़ इस मृत्यु का सबब यह लिखता है
कि माधोजी को अचानक "ज़ोर का बुख़ार" आगया। किन्तु
माधोजी के जीवन चरित्र का अंगरेज़ रचयिता कीन कुछ और भेद
खोलता है। वह 'तारीखे मुज़फ़्फ़री' के आधार पर लिखता है—
"मृत्यु से पहली शाम को एक हथियारबन्द गिरोह ने माधोजी
को रास्ते में घेर कर मारा।"* कीन लिखता है—"नाना ने इस
- "Madhoji had been way laid the evening before by an armed gang
. . ."-Keene's Madhoji Scindhia.