भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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तैयार कर रहे हैं। माधोजी इस कठिन समस्या के विषय में नाना
फड़नवीस से सलाह करने के लिए पूना आया। इस दरमियान
चार्ल्स मैलेट ने पूना में रह कर माधोजी के विरुद्ध काफ़ी सामान
पैदा कर दिया था।
अहल्याबाई होलकर के आदर्श चरित्र और आदर्श शासन का
ज़िक्र एक पिछले अध्याय में आ चुका है। अहल्याबाई के तीस
वर्ष के शासन में उसकी प्रजा संसार में सब से सुखी और सब से
खुशहाल गिनी जाती थी। विदेशियों के साथ अधिक मेल जोल
रखने के अहल्याबाई सदा ख़िलाफ़ रही। अपने देशवासियों के
खिलाफ़ विदेशियों के साथ 'गुप्त सन्धियाँ' करना उसके लिए
नामुमकिन था। किन्तु अहल्याबाई की मृत्यु के बाद उसके उत्तरा-
धिकारी तुकाजी होलकर में न वह योग्यता रह गई थी और न
वह चरित्र। अंगरेज़ों ने तुकाजी को माधोजी सींधिया के ख़िलाफ़
भड़काना शुरू किया, और ठीक उस समय जब कि माधोजी नाना
फड़नवीस से सलाह करने के लिए पूना आया, तुकाजी होलकर ने
माधोजी के राज पर हमला कर दिया।
ग्राण्ट डफ़ के इतिहास से मालूम होता है कि होलकर और
सींधिया में उस समय कोई ख़ास झगड़ा न
[हाशिया: मराठा मंडल की] था, बल्कि माधोजी सींधिया तुकाजी होलकर
[हाशिया: अव्यवस्था] के साथ प्रेम से रहने के लिए उत्सुक था।
तुकाजी होलकर का माधोजी सींधिया के राज पर हमला करना
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