भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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कलकत्ते पर चढ़ाई करके जिस तरह हो कम्पनी से शाही खिराज
वसूल करता। किन्तु माधोजी अपनी कमज़ोरियों को खूब जानता
था। अंगरेज़ माधोजी के बल को तोड़ने की पहले ही से कोशिशें
कर रहे थे। इतिहास लेखक ग्रॉण्ट डफ़ लिखता है :-
"मिस्टर मैक्फ़रसन ने यह सोचकर कि सींधिया की महत्वाकांक्षा बड़ी
ख़तरनाक हो चली है, दूसरे मराठा नरेशों में सींधिया के ख़िलाफ़ जो ईर्षा
और प्रतिस्पर्धा उत्पन्न हो गई थी, उसे और अधिक भड़काकर सींधिया की
तरक्क़ी को रोकने के लिए उसके मुक़ाबले में दूसरी ताक़तें खड़ी कर देने की
कोशिश की।"*
मॉस्टिन के बाद से अब तक कोई अंगरेज़ एलची पेशवा के
दरबार में न भेजा गया था। अब चार्ल्स मैलेट कम्पनी का एलची
नियुक्त होकर पूना पहुँचा। चार्ल्स मैलेट का ख़ास काम था
माधोजी सींधिया के ख़िलाफ़ दूसरे मराठा नरेशों को भड़काना और
नाना के विरुद्ध गुप्त साज़िशें करना। माधोजी के चित्त में भी
अंगरेज़ों की ओर से काफ़ी शङ्काएँ थीं। स्वयं कॉर्नवालिस का
व्यवहार उसकी ओर ख़ासा रूखा रहा। मूदाजी भोंसले के साथ
अंगरेज़ों ने अब इस तरह का सलूक शुरू किया, जिससे माधोजी
सींधिया को सन्देह होगया कि अंगरेज़ मेरे ख़िलाफ़ मूदाजी को
- "Mr. Macpherson conceived that the ambitious nature of Scindhia's
policy was very dangerous and endeavoured to raise some counterpoise to
his progress by exciting the jealousy and rivalry already entertained towards
him among the other Marhatta chiefs,"- Grant Duff's History of the Mar-
hattas, p. 463.