भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसर जॉन शोर. ४०३
और नाना फड़नवीस दोनों का बल महाराष्ट्र मण्डल में सबसे
अधिक बढ़ा हुआ था। उस मण्डल का नाश करने के लिए अंगरेज़ों
का इनके बल को तोड़ना आवश्यक था। पेशवा माधोराव नारायण
पूरी तरह नाना के कहने में था। पूना में माधोराव नारायण को
मसनद से उतार कर उसकी जगह राघोबा के बालक पुत्र बाजी
राव को पेशवा बनाने के लिए एक गुप्त षड्यन्त्र रचा गया।
माधोजी सींधिया को भी इस षड्यन्त्र में शामिल कर लिया गया।
किन्तु नाना फड़नवीस को इसका पता चल गया। उसने पेशवा
के हुकुम से बाजीराव को गिरफ़्तार करके पूना में क़ैद कर दिया।
माधोजी सींधिया उस समय दिल्ली सम्राट का ख़ास संरक्षक
बना हुआ था। वारन हेस्टिंग्स ने माधोजी से
[हाशिया: माधोजी के ख़िलाफ़ साज़िशें] वादा कर लिया था कि कम्पनी की ओर से
सम्राट का सालाना खिराज आइन्दा आप को
दिया जाया करेगा। मालूम होता है हेस्टिंग्स के समय में यह
मामला यूंही टलता रहा। हेस्टिंग्स के बाद माधोजी ने गवरनर
जनरल मैक्फ़रसन से सम्राट के नाम पर खिराज तलब किया।
मैक्फ़रसन ने टला दिया। अन्त में कॉर्नवालिस ने खिराज देने से
सदा के लिए साफ़ इनकार कर दिया। इस पर दिल्ली सम्राट ने
स्वयं माधोजी को पत्र लिखा कि तुम कलकत्ते पहुँच कर कम्पनी से
शाही खिराज वसूल करो। सम्राट ने एक दूसरा पत्र नाना फड़नवीस
को लिखा और कम्पनी से शाही खिराज वसूल करने में पेशवा
दरबार की मदद चाही। माधोजी का उस समय फ़र्ज़ था कि