भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 679, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें४०२ भारत में अंगरेज़ी राज
ने दिल्ली के आसपास के इलाक़ों पर हमला किया और सम्राट
को कुछ समय के लिए एक तरह अपना क़ैदी बना लिया। अंगरेज़
उस समय तक सम्राट की प्रजा थे और बराबर अपने इलाक़ों के
लिए सम्राट को ख़िराज दिया करते थे। वारन हेस्टिंग्स ने बजाय
सम्राट की सहायता करने के माधोजी को हर तरह उकसाया और
बाद में अंगरेज़ों ने सम्राट की असहाय अवस्था से लाभ उठाकर
ख़िराज भेजना बन्द कर दिया।
माधोजी के बढ़ते हुए बल को देखकर महाराष्ट्र मण्डल के दूसरे
सदस्यों को ईर्षा होना स्वाभाविक था। अन्त
[हाशिया: माधोजी सींधिया] में यह ईर्षा ही मराठों की सत्ता के नाश की
[हाशिया: के नाश की] सबसे बड़ी वजह हुई। कलकत्ते की कौन्सिल
[हाशिया: तदबीरें] की काररवाई में दर्ज है कि एक बार कौन्सिल
के कुछ सदस्यों ने यह शक ज़ाहिर किया कि माधोजी के बल का
बढ़ते जाना कम्पनी के लिए ख़तरनाक है। इस पर वारन हेस्टिंग्स
ने उन्हें विश्वास दिलाया कि माधोजी की नई सेना ही अन्त में
उसके विनाश का सबब होगी। वारन हेस्टिंग्स को अपनी चाल पर
पूरा क़ाबू था, और उसके जीवन ही में उसकी यह पेशीनगोई
सच्ची साबित होगई।
माधोजी सींधिया का बल बढ़ता जा रहा था। अंगरेज़ों के
लिए उसे सीमा के अन्दर रखना ज़रूरी था। माधोजी सींधिया
supporting the authority of the former against the latter and did contrive
and effect the ruin of them all, ... ... ."-One of the charges against
Warren Hastings in his impeachment in England.