भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 677, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ें४०० भारत में अंगरेज़ी राज
इंगलिस्तान जाना बन्द कर देने के लिए उस समय इंगलिस्तान में
ज़बरदस्त आन्दोलन जारी था। किन्तु यह कहानी एक दूसरे
अध्याय में दी जायगी।
मीर जाफ़र के उत्तराधिकारी अभी तक मुर्शिदाबाद की नुमायशी
मसनद पर बैठते चले आते थे। चुनांचे सर जॉन शोर के भारत
पहुँचने के एक महीने पहले ३७ साल की आयु में २३ साल तक
सूबेदारी की मसनद पर बैठने के बाद नवाब मुबारकुद्दौला की मृत्यु
हुई। मुबारकुद्दौला के बारह लड़के और तेरह लड़कियाँ थीं, जिनमें
सबसे बड़े लड़के वज़ीरुद्दौला के मसनद पर बैठने का २८ सितम्बर
सन् १७६३ को कलकत्ते में कम्पनी की ओर से बाक़ायदा एलान
किया गया।
एक पिछले अध्याय में पहले मराठा युद्ध और सन् १७८२ की
सालबाई वाली सन्धि का ज़िक्र आ चुका है।
[हाशिया: वारन हेस्टिंग्स की दोहरी साज़िशें] माधोराव नारायण उस समय पेशवा था। नाना
फड़नवीस उसका प्रधान मन्त्री था और हत्यारे
राघोबा को गोदावरी के तट पर कोपरगाँव भेज दिया गया था।
सन् १७८४ के शुरू में कोपरगाँव ही में राघोबा की मृत्यु हुई।
उसका बेटा बाजीराव जिसकी आयु ६ साल की थी, उस समय
पूना में था।
माधोजी सींधिया वारन हेस्टिंग्स के हाथों की एक ख़ास
कठपुतली था। माधोजी के साथ गुप्त सन्धियाँ और समझौते करके
हेस्टिंग्स उसके ज़रिये एक ओर मराठों की शक्ति का नाश करना