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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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सर जॉन शोर ३६६
पर लगाया जा रहा है उनमें से कुछ में मिस्टर शोर वास्तव में हेस्टिंग्स का
एक ख़ास साथी और सहायक था। × × ×
× × ×
“ऐसी हालत में आपके लिए यह सोच लेना बुद्धिमानी होगी कि एक
ऐसे आदमी को, जिसका चरित्र ज़ाहिरा आप ही के काग़ज़ात से अत्यन्त
निन्दनीय मालूम होता है, सब से ऊँचे और सब से अधिक अधिकार युक्त
पद पर नियुक्त करने के क्या नतीजे हो सकते हैं × × ×।”*
बर्क ने इससे कहीं अधिक ज़ोरदार पत्र इंगलिस्तान के 'भारत
मन्त्री' हेनरी डण्डास के पास भेजा।
किन्तु इन पत्रों का इंगलिस्तान के अधिकारियों पर कोई असर
न हुआ और २८ अक्तूबर सन् १७६३ को सर जॉन शोर ने कलकत्ते
पहुँच कर गवरनर जनरल का काम सँभाल लिया।
उसी साल पार्लिमेण्ट ने एक नए शाही चार्टर के ज़रिए ईस्ट
इण्डिया कम्पनी की ज़िन्दगी बीस साल के लिए और बढ़ा दी।
हिन्दोस्तान का बना हुआ माल और ख़ासकर यहां का बुना कपड़ा

  • "... ... ... we have found Mr. Shore materially concerned as a
    principal actor and party in certain of the offences charged upon Mr.
    Hastings; ... ... ...
    ... ... ...
    "In that situation, it is for the prudence of the court to consider the
    consequences which possibly may follow from sending out, in offices of the
    highest rank and of the highest possible power, persons whose conduct,
    appearing on their own Records, is, at the first view, very reprehensible;
    ... ... ..."-Letter from Edmund Burke to Francis Baring, Chairman of the
    Court of Directors, dated October 14, 1792.