सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

पृष्ठ 675, कुल 727 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 675

बारहवाँ अध्याय
• — • — •
सर जॉन शोर
[ १७६३-१७६८ ]
सर जॉन शोर वारेन हेस्टिंग्स के समय में बंगाल के अन्दर
कम्पनी का एक मामूली नौकर रह चुका था।
सर जॉन शोर की वारेन हेस्टिंग्स का वह पटु शिष्य था और वारेन
नियुक्ति हेस्टिंग्स ही के ज़रिये उसने इतनी तरक्क़ी की।
इंगलिस्तान के मन्त्रियों और कम्पनी के डाइरेक्टरों ने मिलकर
जिस समय सर जॉन शोर को गवरनर जनरल बनाकर भेजने का
इरादा किया उस समय पालिमेण्ट में वारेन हेस्टिंग्स के ऊपर
मुक़दमा चल रहा था। एडमण्ड बर्क उस मुक़दमे में सरकारी
वकील था। बर्क ने कम्पनी के डाइरेक्टरों को लिखा—
“ × × × हमें पता लगा है कि जिन जुर्मों का इलज़ाम वारन हेस्टिंग्स