भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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कार्नवालिस के समय में हिन्दोस्तान का केवल थोड़ा सा
देश की दशा हिस्सा कम्पनी के अधीन था और बाक़ी बहुत
बड़ा हिस्सा मराठों, टीपू, निज़ाम और नवाब
अवध के शासन में था, किन्तु दोनों हिस्सों की तुलना अत्यन्त
शिक्षाप्रद थी। ब्रिटिश भारत चारों ओर उजाड़, दरिद्र और
वीरान नज़र आता था और देशी भारत इधर से उधर तक हरा
भरा, खुशहाल और आबाद दिखाई देता था। देशी भारत के
अन्दर की आपसी लड़ाइयाँ भी प्रजा की खुशहाली के लिए
उतनी घातक न होती थीं जितनी ब्रिटिश भारत का लगातार
कुशासन और आए दिन की जायज़ और नाजायज़ लूट । प्रजा के
जान माल की उस समय के ब्रिटिश भारत में कोई भी क़द्र या
हिफ़ाज़त न थी। इस कथन के समर्थन में उस समय के अनेक देशी
और विदेशी लेखकों की गवाही पेश की जा सकती है। हम यहाँ
पर केवल कम्पनी की एक सरकारी रिपोर्ट से एक वाक्य नक़ल
करते हैं। सन् १८१२ की पाँचवीं सरकारी रिपोर्ट में लिखा है—
"राजशाही में डकैती खूब फैली हुई है। × × × फिर भी लोगों की
हालत की ओर काफ़ी ध्यान नहीं दिया जाता। इस बात से इनकार नहीं
किया जा सकता कि वास्तव में लोगों की जान और माल की कोई हिफ़ाज़त
नहीं की जाती। बंगाल के अधिकांश ज़िलों की यही हालत है।""*
- "That dacoity is very prevalent in Raj Shaye. . . . . Yet the
situation of the people is not sufficiently attended to. It can not be denied,
that, in point of fact, there is no protection for persons or property. Such