भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 672, कुल 727 में से
संदर्भ में पढ़ेंलॉर्ड कॉर्नवालिस ३६५
दिवाले से बचाने का केवल एक ही उपाय हो सकता था। वह यह
था कि नए सिरे से बन्दोबस्त करके सदा के लिए एक मुनासिब
लगान तय कर दिया जाय। कॉर्नवालिस से दस साल पहले कुछ
अंगरेज़ अफ़सर यह सलाह दे चुके थे और कम्पनी के डाइरेक्टरों
ने कॉर्नवालिस को भारत भेजते समय उसे इस्तमरारी बन्दोबस्त
करने की हिदायत कर दी थी।
इस इस्तमरारी बन्दोबस्त के साथ साथ कॉर्नवालिस ने यह
क़ानून भी पास कर दिया कि जिन जिन ज़मींदारों के ज़िम्मे लगान
बाक़ी है उनकी ज़मींदारियाँ फ़ौरन नीलाम कर दी जावें और ज्योंही
आइन्दा किसी के ज़िम्मे बकाया निकले, त्योंही उसकी ज़मीन
नीलाम कर दी जाय और ऐसे मौक़ों पर बड़ी बड़ी ज़मींदारियों के
टुकड़े करके उन्हें अलग अलग नीलाम किया जाय।
एक अंगरेज़ लेखक लिखता है कि कॉर्नवालिस के इस्तमरारी
बन्दोबस्त के दस साल के अन्दर बंगाल भर की तमाम ज़मींदारियों
की शक्लें और उनके मालिक सब बदल गए। इस प्रकार कॉर्नवालिस
ने इस्तमरारी बन्दोबस्त के बहाने बंगाल के हज़ारों पुराने घरानों
और तमाम बड़ी बड़ी ज़मींदारियों का ख़ात्मा कर दिया और
उसकी जगह नए छोटे छोटे निर्बल और ख़ुशामदी ज़मींदार पैदा
कर दिए।*
* Memorandum on the Revenue Administration of the Lower Provinces
of Bengal, by J. Macneile, p. 9.