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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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३६४ भारत में अंगरेज़ी राज
किन्तु कॉर्नवालिस खूब समझता था कि किसी भी परतन्त्र
देश में पराजित क़ौम के चरित्र भ्रष्ट कर देने और उसे चरित्र भ्रष्ट
रखने में ही विदेशी शासकों का सब से अधिक बल है।
लॉर्ड कॉर्नवालिस के शासन काल की सब से अधिक महत्व की
इस्तमरारी घटना बंगाल का इस्तमरारी बन्दोबस्त बताई
बन्दोबस्त जाती है। असली बात यह थी कि जिस समय
कम्पनी ने तीनों प्रान्तों की दीवानी दिल्ली सम्राट
सं प्राप्त की और धीरे धीरे उन प्रान्तों पर अपना शासन जमाना
शुरू किया उस समय से उन्होंने हर जगह नया बन्दोबस्त करके
सरकारी लगान बेहद बढ़ा दिया, जिसका ज़िक्र एक पिछले
अध्याय में किया जा चुका है। एडमंड बर्क लिखता है कि लगान
बेहद बढ़ा दिए जाने की वजह से ही सारा "देश वीरान दिखाई
देने लगा।"* इस लगान बढ़ाए जाने ही का एक नतीजा बंगाल
भर के अन्दर सन् १७७० का वह भयंकर दुष्काल था जिसके
समान आपत्ति देश पर पहले कभी न आई थी और जिसमें लाखों
गाँव उजड़ गए।
जिस समय कॉर्नवालिस बंगाल पहुँचा, कम्पनी का ख़ज़ाना
ख़ाली पड़ा था, अच्छी से अच्छी ज़मीन बिना जोती बोई और
वीरान पड़ी हुई थी और अधिकांश ज़मींदारों के ज़िम्मे कई कई
साल का लगान बाक़ी चला आ रहा था जिसे चुका सकना उनकी
शक्ति सं बिल्कुल बाहर था। इस शोचनीय अवस्था में कम्पनी को

  • "The country has turned into a desert." Edmund Burke.