भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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कर सके। इस तरह बङ्गाल, बिहार और उड़ीसा के प्रान्त अब
साफ़ साफ़ दिल्ली साम्राज्य से कटकर अंगरेज़ कम्पनी के स्वायत्त
शासन में आ गए ।
अवध के नवाब के साथ भी कॉर्नवालिस का सलूक इसी
तरह का था। कम्पनी की एक विशाल सेना
[पार्श्व टिप्पणी: कॉर्नवालिस और नवाब अवध] जिसके सब अफ़सर अंगरेज़ थे, ज़बरदस्ती
अवध के ऊपर मढ़ दी गई थी। नवाब को
उसका ख़र्च देना पड़ता था। वारन हेस्टिंग्स ने नवाब से वादा
किया था कि भविष्य में जब ज़रूरत न रहेगी तो यह सेना अवध
से वापस बुला ली जायगी। नवाब ने अब उस वादे को पूरा करने
के लिए कॉर्नवालिस से प्रार्थना की। किन्तु इतिहास लेखक मिल
लिखता है :—
"गोकि उस समय अवध के सामने कोई ख़ास ख़तरा न था, और
जितने रुपए नवाब से कम्पनी को लेने का हक़ था उससे ज़्यादा फ़तहगढ़
की इस सेना पर नवाब का ख़र्च होता था, फिर भी कॉर्नवालिस अपने इस
निश्चय पर क़ायम रहा कि सेना फ़तहगढ़ से न हटाई जावे।"*
इस प्रकार ब्रिटिश साम्राज्य पिपासा को भविष्य में शान्त
करने के वास्तविक उद्देश से पचास लाख रुपए सालाना से ऊपर
का दण्ड ज़बरदस्ती कम्पनी के मित्र अवध के नवाब से वसूल
किया जाता रहा।
- Mill, vol. V. p. 222.