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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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पृष्ठ 654

[लॉर्ड कॉर्नवालिस ३७६]

मराठों और निज़ाम तीन तीन ताक़तों की सेनाओं द्वारा कई तरफ़
से घिर गया और दूसरी ओर उसकी अपनी सेना में विश्वासघातक
पैदा होगए ।
इस पर भी कॉर्नवालिस का काम इतना आसान न था । टीपू
[पार्श्व-शीर्षक: “शोकजनक] ने वीरता के साथ अपने तीनों शत्रुओं का
संहार”] मुक़ाबला किया । कई महीने युद्ध जारी रहा ।
उस युद्ध की अनेक लड़ाइयों को विस्तार के
साथ बयान करने की आवश्यकता नहीं है । किन्तु अकेला टीपू
इस तरह के तीन शत्रुओं का मुक़ाबला और इन हालतों में कब तक
कर सकता था ? अन्त में टीपू को पीछे हटना पड़ा, यहाँ तक कि
बंगलोर का नगर अंगरेज़ों के हाथों में आ गया । बंगलोर विजय के
बाद कॉर्नवालिस की आज्ञा से उसकी सेना ने बंगलोर निवासियों
के साथ जो व्यवहार किया उसे इतिहास लेखक मिल “शोकजनक
संहार” * कह कर बयान करता है । बंगलोर के नगर को जी भर
के लूटा गया ।
बंगलोर लेने के बाद कॉर्नवालिस ने मैसूर की राजधानी
श्रीरंगपट्टन पर चढ़ाई की । जिस समय अंगरेज़ी
[पार्श्व-शीर्षक: श्रीरंगपट्टन पर] सेना राजधानी के निकट पहुँची, टीपू ने अपने
[पार्श्व-शीर्षक: अंगरेज़ों की चढ़ाई] एक दूत के हाथ अनेक ऊँट फलों से लदवा कर
सुलह की इच्छा के चिह्न रूप कॉर्नवालिस की सेवा में भेजे, किन्तु


  • "Deplorable carnage."—Mill.