भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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दसवाँ अध्याय
सर जॉन मैकफ़रसन
वारन हेस्टिंग्स के बाद कलकत्ते की कौन्सिल का प्रमुख सदस्य
नवाब मोहम्मदअली सर जॉन मैकफ़रसन अस्थायी तौर पर कम्पनी
को इंगलिस्तान के के भारतीय इलाक़ों का गवरनर जनरल नियुक्त
बादशाह की हुआ। मैकफ़रसन के समय में कोई ख़ास
भेंट लिखने योग्य घटना नहीं हुई; किन्तु उसका
चरित्र ख़ासा मनोरञ्जक था।
मैकफ़रसन सबसे पहले सन् १७६७ में किसी जहाज़ का
बख़्शी (पेमास्टर) नियुक्त होकर हिन्दोस्तान आया। वह ख़ासा
पढ़ा लिखा और चलता पुर्ज़ा था। इस पुस्तक के पहले अध्याय
में आ चुका है कि करनाटक की गद्दी के ऊपर अंगरेज़ों, फ़्रांसीसियों
और निज़ाम ने अलग अलग हक़दारों का पक्ष लेकर काफ़ी लड़ाइयाँ