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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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हैदरअली ३५६
थे। यदि कोई सरकारी कर्मचारी प्रजा के ऊपर किसी तरह का
अत्याचार करता था तो हैदरअली सदा उसे कड़ी से कड़ी सज़ा
देता था। उसके राज भर में इस बात की सख़्त आज्ञा थी कि
किसानों से उनकी नियत मालगुज़ारी के अलावा एक कौड़ी भी
किसी बहाने न ली जावे।
हैदरअली की बुद्धि की प्रखरता और उसकी याददाश्त बिलकुल
[बुद्धि की] अलौकिक थी। नैपोलियन के समान वह एक
[प्रखरता] साथ कई कई काम किया करता था। वह जिस
वक्त कोई मामूली तमाशा देखता रहता था
उसी वक्त कुछ लोगों से प्रश्न करता रहता था, जवाब देता रहता
था, अख़बार सुनता था, चिट्ठियां सुनता था, चिट्ठियाँ लिखवाता
था और साथ ही अपने मन्त्रियों के साथ गम्भीर से गम्भीर प्रश्नों
पर बातचीत करता रहता था और उनका फ़ैसला करता रहता
था। ये सब काम एक साथ चलते रहते थे। एक साथ वह तीस
तीस और चालीस चालीस मुन्शियों से काम लेता रहता था।
रोज़ सुबह को जब वह एक चौकी पर बैठकर हाथ मुंह धोया
करता था, उसी समय उसके अनेक जासूस उसकी चौकी के चारों
ओर खड़े हो जाते थे और पिछले चौबीस घण्टे का अपना अपना
हाल सुनाते थे। ये सब जासूस एक साथ बोलते थे। हैदर मुंह
धोते धोते सब की बात सुनता था, केवल आवाज़ से उन्हें पहचानता
था, और जिससे ज़रूरत समझता था बीच बीच में सवाल कर
लेता था। मनुष्य के चरित्र को वह केवल एक बार शक्ल देखकर