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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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३५८ भारत में अंगरेज़ी राज
सामने पेश किया जाय और यदि लड़की न मिले तो आग़ा मोहम्मद
को गिरफ्तार करके मेरे सामने लाया जाय । लड़की आग़ा मोहम्मद
के यहाँ मौजूद थी। उसे उसकी माँ के हवाले कर दिया गया और
आग़ा मोहम्मद का सर काट कर हैदरअली के सामने पेश किया
गया।
हैदरअली के इन्साफ़ की इसी तरह की और भी अनेक रोशन
मिसालें उसकी जीवनियों में मिलती हैं। मीर हुसेनअली ख़ाँ
किरमानी लिखता है कि चोर, उचक्के अथवा डाकू का नाम तक
हैदरअली के राज में कहीं सुनने में न आता था और यदि अकस्मात्
कहीं पर चोरी हो जाती थी तो उस जगह के पुलिस कर्मचारी को
फ़ौरन मौत की सज़ा दी जाती थी और दूसरा आदमी उसकी
जगह नियुक्त कर दिया जाता था। हैदरअली के हज़ारों जासूस
सल्तनत भर में घूमते रहते थे और उसे प्रजा के सुख दुख की ख़बरें
देते रहते थे। हैदरअली ख़ुद अक्सर वेश बदले कम्बल ओढ़े रात
को श्रीरङ्गपट्टन और अन्य नगरों की गलियों में घूमा करता था
और ग़रीबों और यात्रियों की ख़बर रखता था।
हैदरअली की सारी प्रजा उससे अत्यन्त ख़ुश थी, उसके राज
[पार्श्व टिप्पणी: हैदरअली की प्रजा] भर में चारों ओर ख़ुशहाली थी। तिजारत,
[पार्श्व टिप्पणी: पालकता] उद्योग धन्धों और खेती बाड़ी को खूब उत्तेजना
दी जाती थी। वह ख़ुद कारीगरों और सौदागरों
की खूब मदद करता था। लिखा है कि अकेले कोयम्बत्तुर के
बाज़ार में बीस हज़ार रेशम के थान हर हफ़्ते बिकने के लिए आते