भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहैदरअली ३५७
जमादार था और पच्चीस साल तक हैदरअली की ख़िदमत कर
चुका था। आग़ा मोहम्मद को हैदरअली ने पेन्शन और जागीर
देकर एक महीना हुआ बिदा कर दिया था। हैदरशा ने अपनी
सफ़ाई में आगे बढ़कर अर्ज़ किया—"जहाँपनाह ! यह बुढ़िया
और उसकी बेटी दोनों बदचलन हैं।" हैदरअली फ़ौरन महल की
ओर लौट पड़ा और बुढ़िया को अपने साथ ले गया। महल पहुँच
कर जब लोगों ने हैदरअली से प्रार्थना की कि इस बार हैदरशा को
क्षमा कर दिया जाय तो हैदरअली ने उत्तर दिया—"मैं आप लोगों
की प्रार्थना स्वीकार नहीं कर सकता। किसी बादशाह और उसकी
प्रजा के बीच के पत्र व्यवहार को रोकने से बढ़कर कोई गुनाह हो
ही नहीं सकता। बलवानों का कर्त्तव्य है कि निर्बलों का इन्साफ़
करें। ख़ुदा ने निर्बलों की रक्षा के लिए ही बादशाह को बनाया है
और जो बादशाह अपनी प्रजा के ऊपर ज़ुल्म होने देता है और
ज़ुल्म करने वाले को दण्ड नहीं देता वह इस योग्य है कि उसकी
प्रजा का प्रेम और विश्वास उस पर से हट जावे और प्रजा उसके
ख़िलाफ़ बग़ावत करने लगे।"*
हैदरअली ने सब के सामने अपने जमादार हैदरशा के दो सौ
कोड़े लगवाए। साथ ही उसने एक सवार उस बुढ़िया के साथ
आग़ा मोहम्मद के रहने की जगह भेजा और हुकुम दिया कि यदि
लड़की आग़ा मोहम्मद के यहाँ मिल जाय तो उसे उसकी माँ के
हवाले कर दिया जाय और आग़ा मोहम्मद का सर काट कर मेरे
- History of Hyder Shah By M. M. D. L. T. p. 20.