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भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)

Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal

पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished727 पृष्ठ

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३५६ भारत में अंगरेज़ी राज
सरकार का समय इन बेतुके और बदमाशी के झगड़ों में नष्ट करोगे
तो यक़ीन रक्खो तुम्हारे सर कुचल दिए जावेंगे।”
हैदरअली का इन्साफ़ उस समय दूर दूर तक मशहूर था।
हैदरअली का उसके जीवन चरित्र का एक फ़्रान्सीसी रचयिता
इन्साफ़ लिखता है कि उसकी प्रजा में किसी भी निर्धन
से निर्धन पुरुष या स्त्री को अधिकार था कि
हैदर के सामने आकर अपनी दाद फ़रियाद पेश करे। पहरेदारों
को हुकुम था कि किसी फ़रियादी को किसी समय भी हुज़ूर में
आने से न रोका जावे। वह बड़े ग़ौर से सब की फ़रियाद सुनता
था और सब का इन्साफ़ करता था। एक बार सन् १७६७ ईसवी
में जब कि हैदरअली कोयम्बत्तूर में था, एक दिन शाम को वह हवा
ख़ोरी के लिए जा रहा था। मार्ग में एक बुढ़िया सड़क के एक ओर
आकर लेट गई और “इन्साफ़ ! इन्साफ़ !” चिल्लाने लगी। हैदर
अली ने फ़ौरन अपनी सवारी रोक दी, बुढ़िया को पास बुलाया
और पूछा—“क्या मामला है ?” बुढ़िया ने जवाब दिया—“जहाँ
पनाह ! मेरे केवल एक बेटी थी, आग़ा मोहम्मद उसे भगा ले गया।”
सुलतान ने जवाब दिया—“आग़ा मोहम्मद को यहाँ से गए एक
महीने से ज़्यादा हो गया, तुमने आज तक शिकायत क्यों नहीं
की ?” जवाब मिला—“जहाँपनाह ! मैंने कई बार अर्ज़ियाँ लिखकर
हैदरशा के हाथों में दीं, किन्तु मुझे कोई जवाब नहीं मिला।”
हैदरशा हैदरअली का ख़ास जमादार था जो उस समय हैदरअली
के आगे आगे चल रहा था। आग़ा मोहम्मद उससे पहले का ख़ास