भारत में अंग्रेजी राज (पण्डित सुन्दरलाल - ब्रिटिश औपनिवेशिक लूट व षड्यन्त्रों का प्रामाणिक इतिहास)
Bharat Mein Angreji Raj by Pandit Sunderlal
पण्डित सुन्दरलाल (प्रस्तावना: महात्मा गाँधी) द्वारा
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अंग्रेज़ लेखक मि० गैलेटिक आई० सी० एस० ने दिखाया है कि
हैदरअली ने अपनी सलतनत भर में गोरक्षा का उसी तरह सुन्दर
प्रबन्ध कर रक्खा था जिस तरह बाबर और उसके उत्तराधिकारी
मुग़ल सम्राटों ने। हैदरअली के राज में गोबध का कड़ा निषेध था
और यदि राज भर में कभी कोई मनुष्य गोबध का अपराधी होता
था तो उसके हाथ काट लिए जाते थे।
जगद्गुरु शङ्कराचार्य के चार मुख्य मठों में शृङ्गेरी का मठ मैसूर
[हैदरअली और] के राज में था। शृङ्गेरी मठ के स्वामी उस समय
[जगद्गुरु] के जगद्गुरु शङ्कराचार्य के साथ हैदरअली का
[शङ्कराचार्य] ख़ास 'प्रेम' था। दोनों में खूब पत्र व्यवहार होता
था। वर्त्तमान मैसूर राज के पुरातत्त्व विभाग
ने कृपा कर हमारे पास कनाड़ी भाषा में जगद्गुरु शङ्कराचार्य के
नाम हैदरअली के एक मूल पत्र का फ़ोटो भेजा है जिसे पढ़ने से
मालूम होता है कि हैदरअली जगद्गुरु का कितना अधिक आदर
करता था और किस तरह राज के गम्भीर मामलों में जगद्गुरु की
सलाह लेकर काम करता था। इसी पत्र के साथ हैदरअली ने “एक
हाथी, पाँच घोड़े, एक पालकी, पाँच ऊँट × × × पाँच सोने के
ताफ़्ते (सूर्य चन्द्राङ्कित पताकाएँ, जो जगद्गुरु के साथ चलती
हैं) × × × एक जोड़ी शाल, साढ़े दस हज़ार रुपए नक़द × × ×
इत्यादि” जगद्गुरु की नज़र के तौर पर और “एक ठोस सोने का
फ़तीलसोज़ (शमई) शृङ्गेरी मठ की देवपूजा” के लिए जगद्गुरु
की सेवा में भेजा।